By अभिनय आकाश | Aug 24, 2026
क्या खाड़ी के दो सबसे बड़े दुश्मन सऊदी अरब और ईरान अब एक ही सैन्य छाते के नीचे आने वाले हैं? क्या अमेरिका और इसराइल को घेरने के लिए मुस्लिम देशों का एक ऐसा अमेद्य किला तैयार हो रहा है जिसकी कमान पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी और ईरान के हाथों में होगी? ईरान की संसदीय समाचार एजेंसी खाना मिल्लत के प्रमुख मेहंदी रहीमी ने अलमयादीन को एक दिए इंटरव्यू में यह कहकर सनसनी फैला दी कि ईरान को मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है। तेहरान इस पर गंभीरता से विचार भी कर रहा है।
तुर्की पहले ही साफ कर चुका है कि वह यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक और किसी देश के खिलाफ नहीं कर रहा है। ऐसे में अगर पाकिस्तान की परमाणु ताकत, तुर्की की आधुनिक सेना, सऊदी की वित्तीय शक्ति और ईरान की मिसाइल क्षमता एक साथ आती है तो इसराइल की रणनीतिक घेराबंदी पूरी तरह पस्त हो जाएगी। लेकिन सवाल यह भी है कि जो तीनों देश अमेरिका के मित्र देश हैं, चाहे वो पाकिस्तान, सऊदी या फिर तुर्की हो। वो क्या ईरान जैसे दुश्मन को अपने गुट में शामिल करेंगे? एक तरफ पाकिस्तान खुद को इस्लामिक नाटो का मुख्य रणनीतिकार पिलर बताकर शेखी बगारने में लगा है। दूसरी तरफ खाड़ी देशों में उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हाल ही में मार्च से जुलाई के बीच छह खाड़ी देशों ने 20,000 से अधिक पाकिस्तानियों को वापस डिपोर्ट कर दिया है। पाकिस्तान नागरिकों पर भीख मांगने, ओवरस्टे करने और अपराधों में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य साख चमकाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ उसके नागरिकों के साथ खाड़ी देशों का यह सलूक इस्लामाबाद के लिए अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी का कारण बन चुका है। ईरान के इस नए सैन्य ब्लॉक में एंट्री अगर हकीकत बनती है तो यह अमेरिका के एक क्षेत्र प्रभाव को खत्म कर सकता है और एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा युग की शुरुआत करेगी। अब देखना यह हो जाता है कि रियाद और वाशिंगटन इस दावे पर क्या आधिकारिक रुख अपनाते हैं या फिर अंकारा या इस्लामाबाद की ओर से क्या इस पर कोई आधिकारिक तौर पर बयान जारी किया जाएगा।