By अभिनय आकाश | Jun 24, 2026
इजरायल चाहे कितना भी रौद्र रूप दिखा ले, कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर ले, अपनी जिद पर अड़ने का स्वांग करें, लेकिन सच्चाई तो यह है कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल को हमले बंद करने पड़े हैं। यूनाइटेड नेशंस का बयान भी आ गया है कि 23 जून मंगलवार वो दिन था जिस दिन ना तो इजरायल ने साउथ लेबनान पर हिजबुल्ला पर अटैक किया और ना ही हिजबुल्लाह की तरफ से कोई एक्शन हुआ। यानी पूरे दिन अमन रहा, शांति रही। 2 मार्च को ईरान, अमेरिका इजरायल जंग के बीच हिजबुल्ला भी कूद पड़ा था और तब से 22 जून तक एक दूसरे पर हमलों का सिलसिला जारी रहा। यहां तक कि ईरान अमेरिका पीस डील का जब मसौदा तय हो रहा था तो ईरान ने साफ कह दिया था कि वह डील को तभी मानेगा जब लेबनान में हिजबुल्ला पर इजरायल के हमले रुकेंगे।
यह सुनने के बाद ईरान के डेलीगेशन ने वहां मौजूद अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस से कहा कि जो डील हो रही है उसका पहला ही पॉइंट है कि एक दूसरे के खिलाफ इस तरह के दुश्मनी वाले बयान नहीं दिए जाएंगे। एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल ट्रंप इजरायल को समझा नहीं पा रहे थे। इसलिए ईरान पर खीज उतार रहे थे और कह रहे थे कि ईरान हिजबुल्लाह को समझाए। इसके बाद इस डील के मीडिएटर पाकिस्तान और क़तर ने उन्हें समझाया कि बातचीत चलती रहनी चाहिए। फिर सहमति बनी कि लेबनान के इशू पर इजरायल को रुकना पड़ेगा।
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