By अभिनय आकाश | Jul 18, 2026
मध्यस्थ बनने वाला पाकिस्तान अब कई ओर से घिर चुका है। खाड़ी देशों में छिड़ी इस भीषण जंग में इस्लामाबाद के लिए न्यूट्रल रहना अब नामुमकिन सा हो चुका है। शहबाज-मुनीर की जोड़ी जो कल तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज सजाने की कोशिश कर रही थी। आज वह खुद एक बेहद खतरनाक रणनीतिक जाल में फंस चुके हैं। वजह साफ है यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर दोबारा मिसाइल हमले कर दिए। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक सीधा रक्षा समझौता है जिसके तहत अगर सऊदी अरब पर कोई भी बाहरी हमला होता है तो पाकिस्तानी सेना को उसके बचाव में मैदान में उतरना पड़ेगा। यही वजह है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में खड़े होकर बेहद सख्त लहजे में कहा कि ईरान को पाकिस्तान सऊदी का रक्षा समझौता याद रखना चाहिए।
होर्मुज स्टेट में संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर शिपिंग कॉरिडोर बनाने वाला ओमान भी अब ईरान के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान द्वारा ओमानी कॉरिडोर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों के बाद ओमान ने तहरान से कड़ी चेतावनी दी और इन हमलों को तुरंत रोकने की अपील की। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान पूरे खाड़ी क्षेत्र को यह संदेश देना चाहता है कि अगर उसके खिलाफ सैन्य कारवाई होगी, उससे गद्दारी होगी तो उसका असर सिर्फ अमेरिका इसराइल तक सीमित नहीं रहेगा। वो उर्मू स्टेट पर पूरी तरीके से अपनी शर्तें लगाएगा। लेकिन ईरान की यह रणनीति अब उसके खिलाफ एक नया क्षेत्रीय गठबंधन खड़ा करने लगी है। पश्चिमी और खाड़ी मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय ईरान की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ अमेरिकी मिसाइलें नहीं। असल चुनौती यह है कि उसके वो साझेदार भी उससे दूरी बना रहे हैं या फिर उसे धोखा दे रहे हैं जो कल तक उसके लिए मध्यस्थ की भूमिका में थे। क़तर अमेरिका के पाले में जा रहा है। पाकिस्तान दोहरे दबाव में है और ओमान का रुख भी बदल चुका है।