Iran में तबाही के बीच बगदाद से लेबनान तक तेज हुए मिसाइल और ड्रोन हमले, Tehran बोला- दुश्मनों के लिए Hormuz बंद

By नीरज कुमार दुबे | Mar 16, 2026

पश्चिम एशिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच भड़कती जंग अब पूरे इलाके को अपनी चपेट में लेती जा रही है। हम आपको बता दें कि ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी जेट विमानों ने ईरान के चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के पास सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हमले के बाद इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और पूरा इलाका दहल उठा। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान की सीमा के नजदीक स्थित है और रणनीतिक नजरिये से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस बीच, इजराइल और अमेरिका ने ईरान के अंदर हमलों का दायरा और तेज कर दिया है। तेहरान, हमदान और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में नए हमले किए गए हैं। इजरायली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने दावा किया है कि ईरान के भीतर अब भी हजारों सैन्य ठिकाने ऐसे हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि अभियान अभी खत्म होने से बहुत दूर है और जरूरत पड़ी तो हमले और तेज होंगे।

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दूसरी ओर ईरान ने युद्धविराम की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि तेहरान ने अमेरिका से किसी भी तरह के युद्धविराम की मांग नहीं की है। उनका कहना है कि जब तक हमलों का खतरा बना रहेगा तब तक बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने भी कहा है कि युद्ध का अंत तभी स्वीकार होगा जब वह पूरी तरह निर्णायक और स्थायी हो।

उधर, जंग का असर अब पूरे पश्चिम एशिया में फैलता दिखाई दे रहा है। इराक की राजधानी बगदाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को रॉकेट और ड्रोन से निशाना बनाया गया। यहां अमेरिका का कूटनीतिक मिशन मौजूद है। वहीं बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब ने दावा किया है कि उनके एअर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि संघर्ष अब क्षेत्रीय टकराव का रूप लेता जा रहा है।

लेबनान में भी हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई कस्बों पर नए हवाई हमले किए हैं और सीमा की ओर टैंक तथा सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक लेबनान में करीब आठ सौ पचास लोगों की जान जा चुकी है। इससे सीमा पर व्यापक युद्ध की आशंका और गहरा गई है।

वहीं इजराइली सेना का दावा है कि उसने अब तक ईरान पर करीब सात हजार छह सौ हमले किए हैं और ईरान की 85 प्रतिशत वायु रक्षा क्षमता को ध्वस्त कर दिया है। उधर ईरान की राहत संस्था के अनुसार इन हमलों में अब तक तेरह सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, हाल ही में इजराइल ने तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर उस विमान को भी नष्ट करने का दावा किया है जिसका इस्तेमाल कभी ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई करते थे।

उधर, ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बगाई ने कहा कि यह जलमार्ग उन देशों के लिए खुला नहीं रहेगा जो ईरान पर हमले के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय असुरक्षा के कारण जहाजों की आवाजाही विशेष शर्तों और समन्वय के साथ ही हो सकेगी और इस मार्ग की निगरानी ईरान की सशस्त्र सेनाएं कर रही हैं।

इस बीच ईरान में इंटरनेट सेवाएं भी लगभग ठप हो चुकी हैं। निगरानी संस्थाओं के अनुसार देश में इंटरनेट बंदी का सत्रहवां दिन चल रहा है। दूरसंचार नेटवर्क में गिरावट के कारण संचार सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं और कई सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं।

उधर, संघर्ष का असर वैश्विक परिवहन और अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में जानकारी दी है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारतीय विमान कंपनियों की चार हजार तीन सौ पैंतीस उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। विदेशी विमान कंपनियों की भी एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द हुई हैं। उनका कहना है कि जब हवाई क्षेत्र ही बंद हो जाए तो सुरक्षा के लिहाज से उड़ानें चलाना संभव नहीं होता।

उधर भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की मुहिम तेज कर दी है। अब तक पांच सौ पचास से अधिक भारतीयों को ईरान से आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाला जा चुका है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस सहयोग के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां की जनता का आभार व्यक्त किया है। बताया गया है कि ईरान में करीब नौ हजार भारतीय मौजूद थे और जो भी लोग वापस आना चाहते हैं उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते लाने की व्यवस्था की जा रही है।

स्पष्ट है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच भड़की यह जंग अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रही। होरमुज जलमार्ग पर मंडराता संकट, आसमान में उड़ते ड्रोन और मिसाइलें, बंद होते हवाई रास्ते और डगमगाती तेल आपूर्ति यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति को गहरे संकट में धकेल सकता है। दुनिया की नजरें अब इसी सवाल पर टिकी हैं कि क्या यह आग यहीं थमेगी या फिर आने वाले दिनों में इसका विस्फोट और भी भयावह रूप लेगा।

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