अमेरिकी बेस पर Iran का बड़ा Missile Attack, Jordan ने हवा में ही किया नाकाम, तनाव चरम पर

By Ankit Jaiswal | Jul 09, 2026

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई के बीच अब जॉर्डन भी इस संघर्ष की चपेट में आ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य कमान एवं नियंत्रण केंद्र को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। वहीं जॉर्डन का कहना है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया और किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया है।

दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक क्षेत्र में स्थित अमेरिकी कमान एवं नियंत्रण केंद्र तथा हवाई अड्डे को निशाना बनाते हुए 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ईरानी सेना ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई की, तो पश्चिम एशिया में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकाने भी उसके निशाने पर होंगे।

गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा दिन है, जब ईरान और अमेरिका के बीच जवाबी सैन्य हमले देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इन घटनाओं ने पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम की स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। साथ ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी तनाव लगातार बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी ने बताया कि जैसे ही ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने जॉर्डन के हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ना शुरू किया, पूरे इलाके में चेतावनी सायरन बजा दिए गए। इसके बाद वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय किया गया और मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। उन्होंने दोहराया कि जॉर्डन किसी भी देश को अपने हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देगा।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब जॉर्डन ने ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है। इससे पहले 11 जून को भी जॉर्डन की सेना ने लगभग 20 मिसाइलों को मार गिराने की जानकारी दी थी। उस समय भी ईरान ने कहा था कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य कमान केंद्र को निशाना बनाया था।

अल-अजराक क्षेत्र का सामरिक महत्व भी काफी अधिक माना जाता है। यहां जॉर्डन का एक महत्वपूर्ण हवाई अड्डा मौजूद है, जहां से पहले अमेरिका, जर्मनी, बेल्जियम और फ्रांस की सेनाएं आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियानों में भाग ले चुकी हैं। हालांकि जॉर्डन सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसके देश में किसी भी विदेशी देश का स्थायी सैन्य अड्डा नहीं है। सरकार के अनुसार कुछ मित्र देशों के सैनिक केवल सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण समझौतों के तहत जॉर्डन की सेना के ठिकानों पर सीमित संख्या में तैनात हैं।

मौजूद सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के बाद से अब तक ईरान की ओर से 281 मिसाइलें और मानव रहित विमान जॉर्डन की दिशा में भेजे गए हैं। इनमें से 261 को जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया। इन हमलों में अब तक 30 लोग घायल हुए थे, जिन्हें उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या सैन्य टकराव और अधिक बढ़ता है।

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