Iran पर IAEA का शिकंजा, मामले को UNSC भेजने के लिए पश्चिमी देशों ने तैयार किया मसौदा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026

वियना, पांच सितंबर (एपी) अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के संचालक मंडल के विचारार्थ एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है, जिसमें परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों का पालन नहीं करने को लेकर ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजने की मांग की गई है। राजनयिकों ने यह जानकारी दी। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत ईरान अपने सभी परमाणु पदार्थों और गतिविधियों की जानकारी देने तथा वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को यह सत्यापित करने की अनुमति देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है कि इनमें से किसी का भी शांतिपूर्ण उद्देश्यों से इतर इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

हालांकि, इस मामले में संयुक्त राष्ट्र की ओर से किसी विशेष दंडात्मक कार्रवाई की संभावना कम है क्योंकि ईरान के सहयोगी रूस और चीन के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार है। ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) द्वारा देखे गए और इससे पहले ‘रॉयटर्स’ द्वारा प्रकाशित प्रस्ताव के मसौदे में आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी से आईएईए के विधान के संबंधित प्रावधानों के अनुसार ‘‘इस प्रस्ताव और पहले पारित प्रस्तावों को एजेंसी के सभी सदस्यों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा को भेजने’’ का अनुरोध किया गया है। प्रस्ताव में ‘‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न चुनौतियों और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर उसके प्रभाव का कूटनीतिक समाधान निकालने के प्रति समर्थन’’ पर भी जोर दिया गया है ताकि ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़ी सभी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान करने वाला समझौता हो सके।

इसमें सभी पक्षों को कूटनीतिक प्रक्रिया में रचनात्मक रूप से शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। राजनयिकों ने बताया कि प्रस्ताव पर अभी बातचीत जारी है और इसे संचालक मंडल के समक्ष औपचारिक रूप से पेश नहीं किया गया है। इसके मसौदे में अभी बदलाव हो सकता है क्योंकि मंडल के सदस्यों के पास संशोधन सुझाने का अवसर है।

औपचारिक रूप से पेश किए जाने के बाद अगले सप्ताह वियना में होने वाली आईएईए के संचालक मंडल की बैठक में इस पर मतदान होगा। जून 2025 में 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद से तेहरान ने आईएईए के निरीक्षकों को प्रभावित परमाणु स्थलों तक पहुंच की अनुमति नहीं दी है। परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान आईएईए के साथ सहयोग करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

एजेंसी जून 2025 में हुई बमबारी के बाद से ईरान में संवर्धित यूरेनियम के भंडार की स्थिति का सत्यापन नहीं कर सकी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा इस साल 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के कारण यह काम और कठिन हो गया है। यह युद्ध छह महीने से जारी है।

आईएईए ने मंगलवार को जारी अपनी गोपनीय रिपोर्ट में चेतावनी दी कि ईरान द्वारा उसके निरीक्षकों को परमाणु ठिकानों तक पहुंच और परमाणु पदार्थों के सत्यापन की अनुमति लगातार नहीं देना ‘‘परमाणु प्रसार का जोखिम’’ पैदा करता है, जिससे ‘‘अत्यंत तत्परता से निपटने’’ की जरूरत है। आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। इसे हथियार बनाने योग्य 90 प्रतिशत शुद्धता के स्तर तक पहुंचाने के लिए केवल एक छोटी तकनीकी प्रक्रिया की जरूरत है।

आईएईए प्रमुख ग्रोसी ने पिछले साल एपी को दिए एक साक्षात्कार में चेतावनी दी थी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का सैन्य इस्तेमाल करने का फैसला करता है तो इस भंडार से वह 10 परमाणु बम तक बना सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि इसका यह मतलब नहीं है कि ईरान के पास ऐसे हथियार हैं।

प्रमुख खबरें

भारत की डिफेंस कंपनी से डील, एक चूक और चली गई रक्षा मंत्री की कुर्सी

China के सैन्य मॉडल की राह पर Pakistan! 50 साल बाद किए बड़े बदलाव, India के लिए क्या हैं मायने?

Avinash Sable ने जताई Asian Games में 3000m Steeplechase का गोल्ड बरकरार रखने की उम्मीद

जीवन की राह में ज्ञान का दीप जलाते हैं शिक्षक