By Ankit Jaiswal | Jan 11, 2026
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक बार फिर माहौल गर्म होता दिख रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर गोपनीय ब्रीफिंग दी गई। यह जानकारी द न्यूयार्क टाइम्स ने अमेरिकी प्रशासन से जुड़े कई अधिकारियों के हवाले से दी। यह ब्रीफिंग ऐसे समय हुई है जब ईरान के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो चुके हैं और उनका असर देश के बाहर भी दिखने लगा है।
बता दें कि ईरान में ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में शुरू हुए थे, जिनकी वजह मुद्रा संकट, बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की कठिनाइयाँ बताई जा रही हैं। धीरे-धीरे ये आंदोलन केवल आर्थिक नाराज़गी तक सीमित न रहकर सीधे ईरान की धार्मिक सत्ता व्यवस्था के खिलाफ चुनौती बन गया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि इंटरनेट पर लगभग पूरी तरह से रोक लगी हुई है।
गौरतलब है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को और सख्ती से निपटने का संदेश दिया है। इसी कड़ी में ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को “ईश्वर का दुश्मन” मानकर कठोरतम सजा दी जा सकती है, जो ईरानी कानून में मौत की सजा तक जाती है।
इन विरोध प्रदर्शनों में कुछ जगहों पर ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में नारे भी सुनाई दिए हैं। उनके बेटे रजा पहलवी ने विदेश से ईरानियों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की है।
ईरान की सीमाओं के बाहर भी इसका असर दिख रहा है। लंदन में ईरानी दूतावास पर प्रदर्शन के दौरान पुराने ‘लायन एंड सन’ झंडे को फहराया गया, जबकि पेरिस, बर्लिन और वॉशिंगटन में भी एकजुटता रैलियाँ देखी गई हैं।
वॉशिंगटन की ओर से चेतावनी भरे बयान जारी हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि अगर ईरानी प्रशासन ने हिंसा और बढ़ाई तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं, हालांकि जमीनी सेना भेजने से इनकार किया गया है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका ईरानी जनता के साथ खड़ा है।
इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर ईरान की स्थिति पर चर्चा की है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में संतुलन बेहद ज़रूरी होगा, ताकि सरकार पर दबाव बने लेकिन आम जनता का रुख शासन के पक्ष में न जाए।
गौरतलब है कि करीब छह महीने पहले अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर ‘मिडनाइट हैमर’ नाम से हमला किया था, जिसके बाद हालात और संवेदनशील हो गए थे। अब जब तेहरान की सड़कों पर फिर से विरोध के नारे गूंज रहे हैं, तो व्हाइट हाउस का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरानी नेतृत्व प्रदर्शनकारियों को दबाने में कितनी दूर तक जाने को तैयार है।