Iran Shahed Drones ने कर दिया था US को परेशान, Merops System लगवा कर Trump ने कर दिया काम तमाम

By नीरज कुमार दुबे | Mar 07, 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के ड्रोन हमलों की चुनौती के बीच अमेरिका ने अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नया कदम उठाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अमेरिका जल्द ही मध्य पूर्व में एक नया प्रति ड्रोन मिसाइल तंत्र तैनात करने जा रहा है। इस तंत्र का नाम मेरोप्स है और इसे विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन को पहचान कर उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

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अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि मेरोप्स प्रणाली की विशेषता यह है कि यह ड्रोन के विरुद्ध ड्रोन का ही उपयोग करती है। यह इतना छोटा है कि इसे मध्यम आकार के पिकअप वाहन के पीछे भी लगाया जा सकता है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन की पहचान कर उनके पास पहुंचती है और फिर उन्हें नष्ट कर देती है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया गया है जिससे यह उपग्रह या इलेक्ट्रानिक संचार बाधित होने की स्थिति में भी लक्ष्य तक पहुंच सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के शाहेद ड्रोन के विरुद्ध अब तक की प्रतिक्रिया निराशाजनक रही है। ईरान द्वारा उपयोग किए जा रहे ड्रोन उस तकनीक का अपेक्षाकृत साधारण रूप हैं जिन्हें रूस यूक्रेन युद्ध में लगातार सुधार और अपडेट के साथ उपयोग कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सस्ते और बड़ी संख्या में छोड़े गए ड्रोन आधुनिक सैन्य शक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की गुप्तचर समिति के वरिष्ठ सदस्य जिम हाइम्स ने भी इस सप्ताह कहा कि अमेरिका मिसाइलों को गिराने में काफी सक्षम है, परंतु बड़ी संख्या में मौजूद ईरानी ड्रोन एक गंभीर समस्या हैं। उन्होंने कहा कि समस्या केवल तकनीकी नहीं बल्कि गणितीय भी है। महंगे रक्षा मिसाइलों से सस्ते ड्रोन को गिराना आर्थिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण है। उनका कहना था कि एक छोटे और सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए बहुत महंगा मिसाइल चलाना पड़ता है, जो लंबे समय तक टिकाऊ रणनीति नहीं हो सकती।

इसी समस्या के समाधान के रूप में मेरोप्स प्रणाली को विकसित किया गया है। यह प्रणाली ड्रोन को पहचान कर उन पर हमला करने वाले छोटे ड्रोन भेजती है। इसकी लागत पारंपरिक रक्षा मिसाइलों की तुलना में बहुत कम है। जहां एक महंगा मिसाइल चलाने की लागत लाखों डॉलर तक पहुंच सकती है, वहीं मेरोप्स प्रणाली अपेक्षाकृत सस्ते साधनों से दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर सकती है।

इस प्रणाली का परीक्षण पहले यूरोप में किया जा चुका है। पिछले वर्ष नवम्बर में रूस के हमलावर ड्रोन कई बार नाटो के वायु क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। इसके बाद पोलैंड और रोमानिया में मेरोप्स प्रणाली को तैनात किया गया था। वहां इसके उपयोग से ड्रोन की पहचान और उन्हें रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। अब उसी अनुभव के आधार पर इसे मध्य पूर्व में भेजा जा रहा है।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार मेरोप्स प्रणाली को मध्य पूर्व के कई स्थानों पर तैनात किया जाएगा। इनमें ऐसे स्थान भी शामिल होंगे जहां अमेरिकी सैनिक सीधे मौजूद नहीं हैं। इस प्रणाली का निर्माण पेरिनियल आटोनोमी नामक कंपनी कर रही है, जिसे प्रौद्योगिकी जगत के प्रमुख उद्यमियों का समर्थन प्राप्त है।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी कहा है कि अमेरिका ने उनके देश से ईरान के शाहेद ड्रोन से निपटने के अनुभव साझा करने का अनुरोध किया है। हम आपको बता दें कि रूस द्वारा यूक्रेन के विरुद्ध इन ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है, जिससे यूक्रेन को उनसे निपटने की व्यावहारिक समझ हासिल हुई है।

पेंटागन के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि ईरान द्वारा छोड़े जा रहे ड्रोन के बड़े समूह को रोकना आसान नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी ठिकाने इन हमलों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि कोई भी प्रणाली हर हमले को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दे सकती, परंतु अधिकतम संभव सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

देखा जाये तो इस घटनाक्रम के व्यापक सामरिक निहितार्थ भी हैं क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। अपेक्षाकृत सस्ते और बड़ी संख्या में छोड़े जाने वाले ड्रोन महंगी और जटिल सैन्य प्रणालियों को भी चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा है। साथ ही भविष्य के युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालित हथियार प्रणालियों का महत्व तेजी से बढ़ेगा।

बहरहाल, मेरोप्स की तैनाती बदलते युद्ध स्वरूप को दर्शाती है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में आकाश में केवल मिसाइल ही नहीं बल्कि ड्रोन के विरुद्ध ड्रोन की लड़ाई भी आधुनिक युद्ध का सामान्य दृश्य बन सकती है।

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