Vishwakhabram: Iran ने तोड़ा अमेरिका का घमंड! 42 युद्धक विमान तबाह, अरबों डॉलर झोंकने के बाद भी हार की कगार पर US

By नीरज कुमार दुबे | May 22, 2026

अमेरिका और इजरायल ने जिस युद्ध को ईरान के खिलाफ अपनी ताकत का प्रदर्शन समझकर शुरू किया था, वही अब उनके गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी कांग्रेस की शोध सेवा की ताजा रिपोर्ट ने उस सच से पर्दा उठा दिया है जिसे अब तक वॉशिंगटन दबाने की कोशिश करता रहा। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ चलाई गई चालीस दिन की भीषण सैन्य मुहिम में अमेरिका के कम से कम 42 सैन्य विमान या तो तबाह हो गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए।

इसे भी पढ़ें: Trump-Netanyahu के बीच क्यों हुआ झगड़ा, ईरान को कैसे इससे मिल गया बड़ा मौका?

रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को इजरायल के साथ मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के नाम से शुरू किया गया था। अमेरिका ने सोचा था कि कुछ ही दिनों में ईरान को घुटनों पर ला दिया जाएगा, लेकिन हालात इसके बिल्कुल उलट हो गए। पूरे पश्चिम एशिया में मिसाइल, समुद्री और हवाई संघर्ष भड़क उठा। अप्रैल में संघर्ष विराम के बाद हमले कुछ समय धीमे जरूर पड़े, लेकिन तनाव अब भी विस्फोटक बना हुआ है।

सबसे बड़ी चोट अमेरिका की उस तकनीकी श्रेष्ठता पर लगी है जिस पर वह वर्षों से दुनिया को डराता आया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि उनकी सेना ने दुनिया के सबसे आधुनिक माने जाने वाले एफ पैंतीस लड़ाकू विमान को मार गिराया। उन्होंने साफ कहा कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो दुनिया को और भी बड़े झटके देखने को मिलेंगे।

युद्ध का आर्थिक बोझ भी अमेरिका की कमर तोड़ने लगा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के नियंत्रक जूल्स हर्स्ट तृतीय ने अमेरिकी सांसदों के सामने माना कि ईरान अभियान की लागत अब 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह रकम लगातार बढ़ रही है क्योंकि तबाह हुए विमानों और सैन्य उपकरणों की मरम्मत और बदली पर भारी खर्च आ रहा है।

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अमेरिकी नौसेना ने चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस से आपातकालीन धन नहीं मिला तो आने वाले महीनों में बजट संकट खड़ा हो जाएगा। युद्ध में कम से कम पंद्रह अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और पांच सौ से ज्यादा घायल हुए हैं। अमेरिकी युद्धपोत जेराल्ड आर फोर्ड में आग लगने की घटना ने अमेरिकी सैन्य व्यवस्था की कमजोरी को और उजागर कर दिया। दूसरी तरफ अमेरिका की वायु रक्षा और लंबी दूरी की मिसाइलों का भंडार तेजी से खाली हो रहा है।

देखा जाये तो ईरान ने इस पूरे संघर्ष में केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी अमेरिका को गहरी चोट पहुंचाई है। हार्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। यही वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अमेरिकी विश्लेषकों तक ने मानना शुरू कर दिया है कि अगर इस क्षेत्र पर ईरान का दबदबा कायम रहता है तो पश्चिम एशिया में अमेरिका की पकड़ ढह सकती है और चीन तथा रूस का प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा।

साथ ही युद्ध के बाद अमेरिका की छवि भी बुरी तरह हिल गई है। जिस देश ने खुद को दुनिया का प्रहरी बताया, वही अब अधूरे युद्ध और बिखरी रणनीति का प्रतीक बनता दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि वियतनाम और अफगानिस्तान जैसी हारों के बावजूद अमेरिका की वैश्विक स्थिति पर इतना बड़ा असर नहीं पड़ा था, लेकिन ईरान के साथ मौजूदा टकराव पूरी तरह अलग है। यह हार ऐसी हो सकती है जिसे न सुधारा जा सके और न छिपाया जा सके।

रिपोर्ट में यह भी साफ कहा गया कि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है क्योंकि कई सूचनाएं अब भी गोपनीय हैं और संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिकी रक्षा विभाग और सेंटकाम अब तक इस युद्ध में हुए वास्तविक नुकसान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। इससे यह आशंका और मजबूत हो रही है कि असली तबाही आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा बड़ी हो सकती है।

इस बीच, संघर्ष विराम के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठप पड़ी है। ईरान की मांग है कि उसके खिलाफ सभी सैन्य कार्रवाइयां बंद हों, उसके सहयोगी गुटों पर हमले रोके जाएं, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के इलाकों से हटे, आर्थिक प्रतिबंध खत्म किए जाएं और फ्रीज किये गये धन को वापस किया जाए। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इन मांगों को मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने परमाणु वार्ता को युद्धविराम से अलग करने की ईरानी मांग को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।

बहरहाल, ईरान युद्ध ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक हथियार और अरबों डॉलर का सैन्य बजट किसी देश को अजेय नहीं बना सकता। अमेरिका ने जिस घमंड के साथ “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया था, वही अब उसकी वैश्विक साख पर सबसे बड़ा हमला बन गया है। दुनिया देख रही है कि पश्चिम एशिया की आग में अमेरिका की सैन्य ताकत, आर्थिक संसाधन और राजनीतिक प्रतिष्ठा तीनों झुलसते जा रहे हैं।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

Cyprus बना India का नया यूरोपीय रणनीतिक साथी, भूमध्यसागर में भारत की एंट्री होते ही Turkey की बढ़ी टेंशन

DRDO में B.Tech, MSc वालों के लिए सुनहरा मौका, 6 महीने की Internship में मिलेगा ₹30,000 स्टाइपेंड

क्या UAPA में लंबी सुनवाई जमानत का आधार? Supreme Court की बड़ी बेंच करेगी फैसला

बर्खास्त सैनिकों को लेकर घिरे Sanjay Singh-Manoj Jha, Indian Army ने खोली पूरी पोल