Prabhasakshi NewsRoom: US भले ताकतवर है, मगर Iran भी कम नहीं! अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डे को बना दिया निशाना

By नीरज कुमार दुबे | May 28, 2026

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया तो ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बना दिया। इस जवाबी कार्रवाई के जरिए ईरान ने पूरी दुनिया को साफ संदेश दिया कि अमेरिका भले खुद को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानता हो, लेकिन ईरान उस ताकत का पूरी क्षमता के साथ जवाब देना जानता है। हम आपको बता दें कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर प्रहार किया है। ईरान के अनुसार अमेरिकी सेना ने हवाई प्रक्षेपास्त्रों से हमला किया था, जिसके कुछ ही समय बाद जवाबी कार्रवाई की गई।

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इसी बीच, अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भी एलान किया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान द्वारा हाल ही में गठित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को प्रतिबंध सूची में डाल दिया है। यह संस्था हार्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और देशों के आवागमन प्रबंधन के लिए बनाई गई थी। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान इस मार्ग के जरिए वैश्विक व्यापार पर दबाव बनाकर धन जुटाना चाहता है, जिसका इस्तेमाल सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों में किया जा सकता है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी या देश इस संस्था को पारगमन शुल्क देता है, तो उस पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब समझौते के लिए मजबूर हो रहा है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह टूट चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में महंगाई ढाई सौ प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और वहां की मुद्रा की कीमत लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई और तेज कर सकता है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि उनकी सरकार ईरान में शासन परिवर्तन की स्थिति तक पहुंच चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही समझौता होगा, हार्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खोल दिया जाएगा।

उधर, हार्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री संकट और गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों के आंकड़ों से पता चला है कि तीन बड़े तेल और गैस टैंकर हाल के दिनों में अपने ट्रांसपोंडर बंद करके इस मार्ग से गुजरे। इनमें दो विशाल तेल टैंकर और एक गैस टैंकर शामिल था, जो भारत और चीन की ओर बढ़ रहे थे। जहाजों की पहचान छिपाकर यात्रा करने से समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र अब दुनिया के सबसे अस्थिर समुद्री इलाकों में बदलता जा रहा है।

युद्ध जैसे हालात के कारण हार्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले प्रतिदिन लगभग एक सौ पच्चीस से एक सौ चालीस जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, लेकिन अब सैन्य तनाव और प्रतिबंधों के डर से यातायात तेजी से घट गया है। खाड़ी क्षेत्र में सैंकड़ों जहाज फंसे हुए हैं और लगभग बीस हजार नाविक समुद्र में ही रुके रहने को मजबूर हैं। इसका असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है।

उधर, इजरायल और लेबनान सीमा पर भी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान के ऊपर एक संदिग्ध हवाई लक्ष्य को मार गिराया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मआयान बारूख और कफर युवाल क्षेत्रों में सायरन बजने लगे। इजरायल लगातार हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के टायर शहर में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर नए हमले भी किए हैं। हमले से पहले नागरिकों को इलाका खाली करने का आदेश दिया गया। सेना ने लोगों से जाहरानी नदी के उत्तर में जाने को कहा, जो इजरायली सीमा से लगभग चालीस किलोमीटर दूर है।

वहीं उत्तरी इजरायल में सैन्य अभियान के दौरान एक महिला सैनिक की मौत की भी खबर है। सेना के अनुसार बीस वर्षीय सार्जेंट की अभियान के दौरान जान गई, जबकि दो अन्य आरक्षित सैनिक घायल हुए हैं। दूसरी ओर गाजा शहर में एक आवासीय इमारत पर हुए इजरायली हवाई हमले में दो बच्चों और एक महिला समेत कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। इस तरह लगातार बढ़ते हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर धकेल दिया है।

हम आपको यह भी बता दें कि लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है। ईरानी सरकारी मीडिया में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक मसौदा समझौते पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत अमेरिका क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी कम कर सकता है और हार्मुज जलडमरूमध्य पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, समझौता होने के बाद एक महीने के भीतर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करने की योजना पर भी विचार हो रहा है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें मनगढ़ंत बताया है, लेकिन लगातार बढ़ते तनाव के बीच ऐसी चर्चाओं ने दुनिया को यह संकेत जरूर दिया है कि युद्ध के साथ-साथ पर्दे के पीछे समझौते की कोशिशें भी तेज हो चुकी हैं।

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