Iran-US Ceasefire | राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया

By रेनू तिवारी | Apr 22, 2026

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के विशेष अनुरोध पर ईरान के साथ जारी युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब पहले से घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्त होने में कुछ ही घंटे शेष थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के व्यक्तिगत अनुरोध को मुख्य कारण बताया।

हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से केवल तभी तक परहेज करेगा, जब तक उसका नेतृत्व बातचीत के लिए एक समेकित प्रस्ताव पेश नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। वेंस और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर को मंगलवार को इस्लामाबाद रवाना होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की ‘‘पाकिस्तान यात्रा मंगलवार को नहीं होगी।’’

ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ‘‘इसलिए अपनी सेना को नाकेबंदी जारी रखने तथा अन्य सभी मामलों में पूरी तरह तैयार और सक्षम रहने का निर्देश दिया है और युद्धविराम को तब तक बढ़ाया जाएगा, जब तक उनका प्रस्ताव पेश नहीं हो जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती।’’ यह घोषणा वॉशिंगटन, इस्लामाबाद और तेहरान के अधिकारियों के बीच कई दिनों से चल रही गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बाद हुई, जिसका उद्देश्य सभी पक्षों को स्वीकार्य मसौदा प्रस्ताव तैयार करना था।

विटकॉफ और कुशनर मंगलवार सुबह मियामी से इस्लामाबाद रवाना होने वाले थे, लेकिन उन्हें व्हाइट हाउस में ‘‘अतिरिक्त बैठकों’’ में शामिल होने को कहा गया। वेंस भी वाशिंगटन में बैठक में शामिल हुए। उनका भी पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम था। युद्धविराम बढ़ाने का फैसला ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मंगलवार सुबह उन्होंने कहा था कि यदि बुधवार तक समझौता नहीं हुआ तो ‘‘बमबारी होगी।’’ उन्होंने यह भी कहा था कि सेना ‘‘पूरी तरह तैयार’’ है। ट्रंप ने मंगलवार दोपहर व्हाइट हाउस में एनसीएए कॉलेज चैंपियंस को संबोधित करते समय ईरान संघर्ष या वार्ता का कोई जिक्र नहीं किया।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने पर ट्रंप का आभार जताया और उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष “व्यापक शांति समझौते” तक पहुंचेंगे। ट्रंप की घोषणा के बाद शरीफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैं व्यक्तिगत रूप से और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ने देने के लिए युद्धविराम बढ़ाने के हमारे अनुरोध को स्वीकार किया।’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर जताए गए ‘‘विश्वास और भरोसे के साथ वह संघर्ष के बातचीत से समाधान के लिए गंभीर प्रयास जारी रखेगा।’’ शरीफ ने कहा, ‘‘मुझे पूरी उम्मीद है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करना जारी रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर के दौरान संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यापक ‘शांति समझौते’ पर पहुंचने में सक्षम होंगे।’’

इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात स्थित 14 व्यक्तियों, संस्थाओं और विमानों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उन पर ईरानी शासन की ओर से हथियार या हथियारों के पुर्जों की खरीद-फरोख्त और उनके परिवहन में शामिल होने का आरोप है। बेसेंट ने कहा, ‘‘ईरानी शासन को वैश्विक ऊर्जा बाजारों से जबरन लाभ उठाने और मिसाइलों व ड्रोन से नागरिकों को निशाना बनाने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’

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उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के खार्ग द्वीप स्थित तेल भंडारण केंद्र कुछ ही दिनों में भर सकते हैं, जिससे तेल कुओं को बंद करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ईरान के समुद्री व्यापार पर रोक सीधे उसके राजस्व के मुख्य स्रोतों पर चोट है।’’ वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘अमेरिकी वित्त मंत्रालय ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक प्रहार) के जरिए अधिकतम दबाव बनाए रखेगा, ताकि तेहरान की धन जुटाने, भेजने और वापस लाने की क्षमता को कमजोर किया जा सके। कोई भी व्यक्ति या जहाज जो गुप्त व्यापार या वित्त के जरिए इसमें मदद करेगा, वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आएगा।’’

अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए नाकेबंदी का सहारा लिया है, ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ खत्म करे। यह अहम समुद्री मार्ग है, जिससे शांति काल में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल गुजरता था। इस जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ के कारण तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

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