India-Iran Relations | पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत आ रहे ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन, चाबहार पोर्ट और व्यापारिक विस्तार पर बनेगी बात?

By रेनू तिवारी | Sep 08, 2026

ईरान ने भारत के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को सदियों पुरानी "सभ्यतागत साझेदारी" करार दिया है। तेहरान की ओर से आए इस बयान से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की आगामी भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, रणनीतिक जुड़ाव और आर्थिक सहयोग को एक नई ऊँचाई पर ले जाना है। पेज़ेशकियन 12 और 13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के ठीक बाद यह बयान आया है।

बघाई ने कहा कि तेहरान ब्रिक्स मंच का इस्तेमाल भारत के साथ बातचीत जारी रखने और करीबी सहयोग के मौकों को तलाशने के लिए करना चाहता है। बघाई ने कहा, "हम निश्चित रूप से ब्रिक्स समिट से मिलने वाले मौके का इस्तेमाल आपसी हित के क्षेत्रों में भारत के साथ अपनी बातचीत और विचार-विमर्श को जारी रखने के लिए करेंगे।"

व्यापार और आर्थिक सहयोग मुख्य फोकस हैं

ईरान ने खास तौर पर व्यापार और आर्थिक जुड़ाव को उन अहम क्षेत्रों के तौर पर बताया है जहाँ दोनों देश अपनी साझेदारी बढ़ा सकते हैं। बघाई ने कहा कि SCO और BRICS दोनों का सदस्य होने के नाते भारत की बड़े बहुपक्षीय मंचों में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, "भारत शंघाई सहयोग संगठन और BRICS दोनों का सदस्य है।" उन्होंने आगे कहा, "यह उन देशों में से भी एक है जिनके साथ हमारे विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे संबंध हैं, खासकर व्यापार और आर्थिक सहयोग में।" तेहरान के बयानों से पता चलता है कि आने वाली ब्रिक्स (BRICS) बैठक में सिर्फ़ कई देशों के बीच होने वाली चर्चाओं से कहीं ज़्यादा कुछ होने की उम्मीद है; ईरान इस मौके का इस्तेमाल भारत के साथ द्विपक्षीय आर्थिक प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत के लिए करना चाहता है।

भारत-ईरान बातचीत में चाबहार पोर्ट अहम बना हुआ है

दोनों देशों के बीच बातचीत के एजेंडे में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी अहम बने रहने की उम्मीद है, जिसमें चाबहार पोर्ट चर्चा का मुख्य विषय रहेगा। बघाई ने कहा, "ईरान और भारत के बीच बातचीत के दौरान आम तौर पर कई मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसमें चाबहार पोर्ट भी शामिल है, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।" ईरानी प्रवक्ता ने भारत के साथ समग्र संबंधों को सकारात्मक बताया और कहा कि इनका विकास जारी है। उन्होंने आगे कहा, "कुल मिलाकर, जैसा कि मैंने कहा, भारत के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और लगातार विकसित हो रहे हैं।"

मोदी-पेज़ेशकियन की बैठक ने ब्रिक्स वार्ता के लिए माहौल तैयार किया

ईरान की ओर से ये ताज़ा बयान पिछले हफ़्ते बिश्केक में मोदी और पेज़ेशकियन के बीच हुई बैठक के बाद आए हैं। यह बैठक महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह दो वर्षों में दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। बातचीत के दौरान, भारत ने क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता लाने के प्रयासों के लिए अपना समर्थन दोहराया। मोदी ने ब्रिक्स और एससीओ (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से ईरान के साथ मिलकर काम करने की भारत की तत्परता भी जताई।

प्रधानमंत्री ने पेज़ेशकियन से कहा कि वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए ईरानी राष्ट्रपति का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। भारत ने द्विपक्षीय व्यापार चैनलों का विस्तार और विविधीकरण करके तेहरान के साथ आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने के अपने इरादे का भी संकेत दिया। बैठक के बाद X पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, "बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की। विभिन्न क्षेत्रों में ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हम आने वाले समय में अपने व्यापार बास्केट का विस्तार और विविधीकरण करना चाहते हैं। हमने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेगा।"

मोदी-पेज़ेशकियन की बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई

दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता, वाणिज्यिक आवाजाही और समुद्री लॉजिस्टिक्स को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मोदी-पेज़ेशकियन की बातचीत को "फलदायी बैठक" बताया। उन्होंने कहा कि नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों की समीक्षा की। जायसवाल ने X पर एक पोस्ट में लिखा- दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया क्षेत्र में हाल की घटनाओं की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने भारत के इस लगातार बने हुए रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने, और समुद्री आवाजाही व व्यापार की आज़ादी की सुरक्षा के लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।

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भारत के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल शामिल

मोदी और पेज़ेशकियन के बीच बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और तेहरान के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। यह बातचीत पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के माहौल में हुई, जहाँ संघर्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री आवाजाही और कमर्शियल लॉजिस्टिक्स को प्रभावित किया है।

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भारत-ईरान संबंधों के लिए ब्रिक्स (BRICS) बैठक क्यों अहम है

पेज़ेशकियन की आने वाली यात्रा दोनों देशों को बिश्केक में हुई बातचीत को आगे बढ़ाने का एक और मौका देती है। जहाँ ब्रिक्स एक व्यापक बहुपक्षीय मंच देता है, वहीं व्यापार, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और चाबहार पोर्ट पर ईरान का ज़ोर यह दिखाता है कि आपसी प्राथमिकताएँ भी इस जुड़ाव के केंद्र में रहेंगी। नई दिल्ली और तेहरान के लिए, तुरंत ध्यान अपनी पुरानी साझेदारी को बनाए रखने पर होगा, साथ ही बातचीत और बहुपक्षीय मंचों के ज़रिए आर्थिक सहयोग बढ़ाने और साझा क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।

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