RTI आवेदनों पर फाइल गायब होने का बहाना नहीं चलेगा, Kerala सूचना आयुक्त ने दी चेतावनी

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केरल के सूचना आयुक्त टी. के. रामकृष्णन ने कोझिकोड में आयोजित एक सुनवाई के दौरान अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीआई आवेदनों पर जानकारी छुपाने या फाइल गायब बताने वाले लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुनवाई के दौरान 15 लंबित शिकायतों का निस्तारण भी किया गया।

कोझिकोड (केरलम), आठ सितंबर केरलम के सूचना आयुक्त टी. के. रामकृष्णन ने उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो संबंधित फाइलों के गायब या अनुपलब्ध होने का दावा करके सूचना अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जानकारी नहीं देते हैं। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में एक सुनवाई के बाद रामकृष्णन ने कहा कि अधिकारी अक्सर आरटीआई आवेदनों के जवाब में कहते हैं कि फाइल का पता नहीं चल सका या उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइल के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित लोक अधिकारियों की होती है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई फाइल गायब है, तो कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए और प्रत्येक फाइल के रखरखाव के लिए एक नामित अधिकारी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह पता लगाना चाहिए कि फाइल किसके पास से गायब हुई और तदनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। रामकृष्णन ने कहा कि अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए और मांगी गई जानकारी निर्धारित समय के भीतर प्रदान करनी चाहिए।

सूचना आयुक्त ने यह भी बताया कि आरटीआई अधिनियम के बारे में जागरुकता पैदा करने के मकसद से अगले माह जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कारंथुर निवासी अब्दुल कलाम द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत पर रामकृष्णन ने कुन्नमंगलम पंचायत के आरटीआई अधिकारी को फाइल का पता लगाने और मांगी गई जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया। निर्धारित शुल्क का भुगतान किए जाने के बावजूद जानकारी और दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान न करने पर उन्होंने कोझिकोड के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के सूचना अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई गई।

बयान में कहा गया कि अधिकारी को शिकायतकर्ता को ‘स्पीड पोस्ट’ के माध्यम से तुरंत जानकारी भेजने का निर्देश दिया गया। नादपुरम थाने के सूचना अधिकारी को आवेदक द्वारा मांगी गई सीसीटीवी फुटेज प्रदान करने का निर्देश दिया गया, जबकि मालाबार देवस्वओम बोर्ड के संबंधित अधिकारी को वह जानकारी देने का निर्देश दिया गया, जिसे डेटा संकलित नहीं होने के आधार पर मुहैया कराए जाने से इनकार कर दिया गया था। बयान में कहा गया कि सुनवाई के दौरान 15 शिकायतों का निस्तारण किया गया।

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