By अभिनय आकाश | Jul 16, 2026
ईरान और अमेरिका में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच 9 जुलाई की रात एक ऐसा हमला हुआ जिसने सैन्य रणनीति और युद्ध के लक्ष्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी। ईरान के उत्तरी गोलस्तान प्रांत में अक काला के पास स्थित अक टेके खान रेलवे पुल पर अमेरिकी क्रूज मिसाइलों से हमला किए जाने की खबर सामने आई। यह पुल ना तो कोई सैन्य अड्डा था और ना मिसाइल साइलो और ना ही वायु रक्षा प्रणाली का हिस्सा था। सबसे अहम बात यह है कि यह स्थान संघर्ष के मुख्य केंद्र माने जाने वाले होमस जलडमरू मध्य से करीब 700 मील दूर स्थित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस नागरिक रेलवे पुल को निशाना क्यों बनाया गया?
हालांकि अमेरिका ने इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया। इस रेलवे लाइन की अहमियत केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसके जरिए रसद, दवाइयों, खाद्यान्न, औद्योगिक सामान और आपातकालीन राहत सामग्री की आवाजाही भी होती है। युद्ध संकट के समय ऐसी रेल लाइनों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों तक आवश्यक वस्तुएं तेजी से पहुंचाई जा सकती है। यही कारण है कि इस मार्ग को ईरान की आर्थिक और रणनीतिक जीवन रेखा के रूप में देखा जाता है। लेकिन अमेरिका का सारा हमला धरा का धरा रह गया क्योंकि ईरान के गोलिस्तान प्रांत के अधिकारियों ने कहा कि मिसाइल हमले के महज 24 घंटे के भीतर पुल की मरम्मत पूरी कर ली गई और उसी रेलवे ट्रैक पर दोबारा ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया।
ईरानी मीडिया ने मरम्मत के बाद पुल से गुजरती ट्रेन के वीडियो और तस्वीरें भी शेयर किए। अधिकारियों ने इसे ईरान की इंजीनियरिंग क्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया का उदाहरण बताया। जानकार मानते हैं कि आधुनिक युद्धों में केवल सैन्य ठिकानों पर हमला ही रणनीति का हिस्सा नहीं होता बल्कि कई बार विरोधी देश की सप्लाई चेन, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के लिए भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है।