By नीरज कुमार दुबे | Apr 07, 2025
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अगुवाई वाली बीजू जनता दल (बीजद) के भीतर का असंतोष एक बार फिर सामने आने लगा है। सवाल उठ रहा है कि नवीन पटनायक ही पार्टी चला रहे हैं या कोई बाहरी ताकत फैसले ले रही है? सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं यह कोई बाहरी ताकत नवीन पटनायक के करीबी पांडियन या उनके परिजन तो नहीं हैं? सवाल यह भी उठ रहा है कि भाजपा और मोदी सरकार का हर तरह से विरोध करने का संकल्प ले चुके नवीन पटनायक अचानक अपना रुख क्यों बदल रहे हैं? सवाल उठ रहा है कि जब सत्तारुढ़ भाजपा के नेता बीजू जनता दल के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाये हुए हैं तो बीजद नेता क्यों नरम रुख अख्तियार किये हुए हैं? ओडिशा में दो दशक से ज्यादा राज करने वाली बीजू जनता दल की इस समय जो स्थिति है उसको देखते हुए पार्टी के नेता ही नहीं बल्कि कार्यकर्ता भी निराश हैं और अपने भविष्य को लेकर संशकित नजर आ रहे हैं। ऐसे में संभावना इस बात की लग रही है कि आने वाले समय में बीजू जनता दल में विभाजन भी हो सकता है। दरअसल पार्टी के कई शीर्ष नेता नवीन पटनायक के निर्देशों को तो स्वीकार करने के लिए तैयार हैं लेकिन वह किसी पूर्व अधिकारी के फरमानों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इसीलिए विवाद बढ़ता जा रहा है।
वहीं विधानसभा में पूर्व में नेता प्रतिपक्ष रहे भूपेंद्र सिंह ने भी वक्फ विधेयक मुद्दे पर पार्टी के भीतर असंतोष को स्वीकार किया। भूपेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘पार्टी के भीतर असंतोष है और हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। हालांकि, हमारे नेता नवीन पटनायक स्थिति को संभालने में सक्षम हैं।’’ उन्होंने कहा कि नवीन पटनायक ने धार्मिक भेदभाव के बिना हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दिया है। यही नहीं, बीजद के कार्यकर्ता भी अब पार्टी के रुख में आए बदलाव की निंदा कर रहे हैं जिससे नवीन पटनायक के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गयी है।
हम आपको बता दें कि यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यसभा में बीजद के नेता सस्मित पात्रा ने एक संदेश पोस्ट किया जिसमें कहा गया कि पार्टी के सदस्य अपनी अंतरात्मा के आधार पर वक्फ विधेयक पर मतदान करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह बयान पार्टी के पहले के निर्णय के विपरीत था, जिसमें संसदीय दल ने विधेयक का विरोध करने का संकल्प लिया था। यहां तक कि पार्टी सांसद मुजीबुल्ला खान ने तीन अप्रैल को संसद के ऊपरी सदन में इसके खिलाफ अपनी बात रखी थी। लेकिन सस्मित पात्रा ने मतदान से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट डाली कि पार्टी सांसद ‘अपनी अंतरात्मा के अनुसार’ मतदान कर सकते हैं और उन्हें कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है। इससे बीजद सांसदों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई और कई वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए कि क्या सस्मित पात्रा पार्टी अध्यक्ष और संसदीय दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक के फैसले को बदल सकते हैं।
वहीं बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग ने राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर मतदान से पहले सांसदों के बीच ‘‘भ्रम पैदा करने’’ के लिए राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सस्मित पात्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी के कई सांसदों का कहना है कि सस्मित पात्रा ने जो भ्रम की स्थिति पैदा की वह गलत थी। राज्यसभा सदस्य देबाशीष सामंतराय ने कहा, ‘‘मैंने भ्रम के कारण मतदान से परहेज किया... पार्टी ने पहले ही विधेयक का विरोध करने का निर्णय ले लिया था और अंतिम समय में हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने के लिए कहा गया।’’ हालांकि, उन्होंने इसके लिए सस्मित पात्रा को जिम्मेदार नहीं ठहराया। देबाशीष सामंतराय ने नवीन पटनायक के एक करीबी सहयोगी की ओर इशारा करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘सस्मित पात्रा यहां खलनायक नहीं हैं। वह निर्णय नहीं लेते, वह केवल निर्देशों का पालन करते हैं। असली शक्ति कहीं और है, ‘मुख्य सलाहकार’ के पास।’’ उन्होंने ‘मुख्य सलाहकार’ का नाम बताने से इंकार कर दिया और कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि वह कौन है’’। यही नहीं, बीजद सांसद देबाशीष सामंतराय ने ‘मुख्य सलाहकार’ और भारतीय जनता पार्टी के बीच ‘बड़ी डील’ का भी संकेत दिया। सामंतराय ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी डील है। मुख्य सलाहकार ने भाजपा के साथ किसी तरह का करार किया है। हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने वाला एक नौकरशाह इस डील का हिस्सा हो सकता है। आप सभी जानते हैं कि हाल ही में किसने वीआरएस लिया है। मैं इसे आपकी समझ पर छोड़ता हूं।’’
हम आपको बता दें कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की ओडिशा कैडर की अधिकारी सुजाता आर कार्तिकेयन ने हाल में वीआरएस लिया है। वह बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक के पूर्व करीबी सहयोगी वीके पांडियन की पत्नी हैं। इसके अलावा, दो वरिष्ठ बीजद नेताओं- प्रफुल्ल सामल और प्रताप जेना ने भी नवीन पटनायक को पत्र लिखकर सस्मित पात्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पात्रा ने ‘‘वक्फ विधेयक के समर्थन में मतदान करके पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर’’ काम किया है। सामल और जेना दोनों ने पटनायक को लिखे अपने पत्रों में कहा कि बीजद मुसलमानों सहित अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है। सामल ने कहा, ‘‘हालांकि, अल्पसंख्यक समुदायों का विश्वास जीतने के बजाय पात्रा की इस तरह की कार्रवाई से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। इसलिए, मैं आपसे उचित कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।’’ वरिष्ठ बीजद नेता और पूर्व मंत्री प्रताप जेना ने पात्रा की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की और इस कदम को ‘पार्टी विरोधी’ और 'हतप्रभ करने वाला’ करार दिया।
इसके अलावा, मुस्लिम बहुल केंद्रपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक गणेश्वर बेहरा ने भी पात्रा की आलोचना करते हुए सवाल किया, ‘‘उनको पार्टी अध्यक्ष के फैसले को बदलने का अधिकार किसने दिया?’’ गणेश्वर बेहरा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्होंने गलती की है जिसके लिए उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। संसदीय दल के निर्णय को बदलने का अधिकार केवल बीजद अध्यक्ष को है, किसी और को नहीं।’’ उन्होंने कहा कि यह घोर अनुशासनहीनता है। वहीं, बीजद विधायक और पूर्व मंत्री बद्री नारायण पात्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘यह स्थिति जानबूझ कर की गई शरारत का नतीजा है। सस्मित पात्रा ने बीजद अध्यक्ष के फैसले की अवहेलना करने और अपने स्वयं के मंच पर अपना रुख बदलने की घोषणा करने का साहस कैसे किया? उन्होंने पूरी पार्टी को असमंजस में डाल दिया है और इस पर कार्रवाई की जरूरत है।''
हम आपको यह भी बता दें कि बीजू जनता दल के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर नवीन पटनायक से मुलाकात के लिए समय भी मांगा है। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने बीजद की कड़ी आलोचना की और उस पर विधेयक के पक्ष में मतदान करके राज्य के मुस्लिम समुदाय से किए गए वादे के खिलाफ जाने का आरोप लगाया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘बीजद संसदीय दल ने विधेयक का विरोध करने का फैसला किया था। हमने यह भी सुना था कि पार्टी इस मुद्दे पर राज्यसभा में मतदान से दूर रहेगी लेकिन अचानक बीजद ने अपना रुख बदल दिया और विधेयक के समर्थन में मतदान किया। बीजद के फैसले से नवीन पटनायक और पार्टी की छवि खराब हुई है।’’
दूसरी ओर, भाजपा सांसद बलभद्र माझी ने बीजद पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘पार्टी के पास कोई विचारधारा या मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है और इसका संचालन अनुभवहीन नेतृत्व कर रहा है। यह पार्टी जल्द ही राज्य के राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो जाएगी।’’