By डॉ. अनिमेष शर्मा | Jul 24, 2026
जब भी कोई नई कार खरीदने की योजना बनाता है, तो सबसे पहले उसकी नजर शोरूम में लगी कीमत पर जाती है। लेकिन समझदारी सिर्फ शुरुआती कीमत देखने में नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों तक होने वाले खर्च को समझने में है। आज पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों का रुझान सीएनजी और इलेक्ट्रिक कारों की ओर तेजी से बढ़ा दिया है।
बजट के लिहाज से देखें तो सीएनजी कारें अधिक आकर्षक दिखाई देती हैं। आमतौर पर किसी मॉडल का सीएनजी वेरिएंट उसके इलेक्ट्रिक वर्जन की तुलना में 2 से 3 लाख रुपये तक सस्ता पड़ता है।
इसका मतलब है कि सीएनजी कार खरीदने के लिए आपको कम डाउन पेमेंट और अपेक्षाकृत छोटे लोन की जरूरत होगी। वहीं, इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए शुरुआत में बड़ा निवेश करना पड़ सकता है।
मान लीजिए आप हर साल करीब 15,000 किलोमीटर कार चलाते हैं। इस हिसाब से 15 वर्षों में आपकी कार लगभग 2.25 लाख किलोमीटर चलेगी।
- प्रति किलोमीटर खर्च: लगभग ₹1 से ₹1.5
- 15 साल का अनुमानित चार्जिंग खर्च: करीब ₹3.37 लाख
- प्रति किलोमीटर खर्च: लगभग ₹3.50 से ₹4
- 15 साल का अनुमानित ईंधन खर्च: करीब ₹9 लाख
यानी सिर्फ ईंधन के खर्च में इलेक्ट्रिक कार आपको करीब 5.5 लाख रुपये तक की बचत दे सकती है। लंबे समय तक अधिक ड्राइविंग करने वालों के लिए यह अंतर काफी बड़ा साबित हो सकता है।
सीएनजी कार में पारंपरिक इंजन, गियरबॉक्स और कई मैकेनिकल पार्ट्स मौजूद रहते हैं। इसलिए समय-समय पर इंजन ऑयल बदलवाना, सर्विसिंग कराना और सीएनजी किट की जांच करवाना जरूरी होता है।
इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक कार में इंजन नहीं होता। इसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी होती है। कम चलने वाले पार्ट्स होने के कारण इसकी नियमित सर्विस का खर्च काफी कम रहता है। यही वजह है कि कई लोग ईवी को कम मेंटेनेंस वाली कार मानते हैं।
इलेक्ट्रिक कार की सबसे बड़ी चिंता उसकी बैटरी है। अधिकांश कंपनियां बैटरी पर लगभग 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं।
अगर आप कार को पूरे 15 साल तक चलाने का इरादा रखते हैं, तो संभावना है कि एक बार बैटरी बदलवानी पड़े। वर्तमान में नई बैटरी की कीमत लगभग 2 से 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
ऐसे में ईंधन पर होने वाली बड़ी बचत का कुछ हिस्सा बैटरी रिप्लेसमेंट में खर्च हो सकता है। इसलिए ईवी खरीदते समय इस पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर आपकी यात्रा अक्सर हाईवे पर होती है, तो सीएनजी कार ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकती है। गैस भरवाने में केवल कुछ मिनट लगते हैं और अब देशभर में सीएनजी स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं।
वहीं, इलेक्ट्रिक कार को चार्ज होने में 45 से 60 मिनट तक लग सकते हैं। हालांकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार बेहतर हो रहा है, लेकिन लंबी यात्राओं में पहले से प्लानिंग करना अभी भी जरूरी है।
पुरानी सीएनजी कारों की मांग बाजार में बनी रहती है और उन्हें बेचना अपेक्षाकृत आसान होता है।
दूसरी ओर, पुरानी इलेक्ट्रिक कार की कीमत काफी हद तक उसकी बैटरी की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि बैटरी की क्षमता कम हो चुकी है, तो रीसेल वैल्यू प्रभावित हो सकती है।
- आप रोजाना 50-60 किलोमीटर या उससे अधिक ड्राइव करते हैं।
- आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर के अंदर होती है।
- आपके घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।
- आपका बजट सीमित है।
- आप साल में 10,000 किलोमीटर से कम गाड़ी चलाते हैं।
- आप अक्सर लंबी हाईवे यात्राएं करते हैं और चार्जिंग की चिंता नहीं चाहते।
अंततः, 15 साल के नजरिए से देखें तो सीएनजी और इलेक्ट्रिक, दोनों ही विकल्प पेट्रोल कार की तुलना में लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं। सही चुनाव आपकी ड्राइविंग आदतों, बजट और सुविधा की जरूरतों पर निर्भर करेगा।
- डॉ. अनिमेष शर्मा