संयोग है या सिर्फ शरारत? क्या दिखाना और क्या छिपाना चाहता है Bollywood

By Prabhasakshi News Desk | Sep 05, 2024

विश्व की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री में शुमार बॉलीवुड लंबे वक्त से भारत की अलग-अलग संस्कृतियों और कहानियों को दर्शाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में मेनस्ट्रीम सिनेमा में हिंदूफोबिया की एक परेशान करने वाली इमेज बनकर सामने आई है। जिससे हिंदू समुदाय के बीच उनके धर्म और संस्कृति के चित्रण को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। इन फिल्मों के अंदर हिंदू पात्रों, परंपराओं और प्रतीकों का निगेटिव दिखाया आजकल फिल्मों में एक कल्चर बन चुका है। जिसके चलते बॉलीवुड पर हिंदू विरोधी भावना को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।

'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' कंट्रोवर्सी

आपको बता दें कि आईसी 814 के असल अपहरणकर्ता इस्लामवादी आतंकवादी थे, फिर भी इन पात्रों को हिंदू नामों से दर्शाने का विकल्प चुना है। ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करने और हिंदू समुदाय को बदनाम करने के प्रयास के रूप में इस निर्णय को देखा गया है। तो वहीं, आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के चित्रण ना सिर्फ इतिहास को गलत तरीके से पेश करते हैं, बल्कि उस चीज को भी दर्शाता है जो गलत तरीके से हिंदुओं को बदनाम करता है। इस फिल्म में आतंकवादियों के लिए हिंदू नामों का उपयोग एक अलग घटना नहीं है, बल्कि बॉलीवुड में एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है। कई लोगों का तर्क है कि यह प्रवृत्ति हानिकारक है, क्योंकि यह सार्वजनिक धारणा को आकार देती है और हानिकारक रूढ़ियों को मजबूत करती है।

 नेटफ्लिक्स ने, हालांकि हाल ही में सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान भारत सरकार को राष्ट्र की भावना के प्रति संवेदनशील होने का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह काफी है?

सिनेमा में हिंदूफोबिया

फिल्मों में हिंदुओं को खलनायक या चरमपंथी के रूप में लगातार चित्रित करने के व्यापक सामाजिक निहितार्थ हैं। यह हिंदू समुदाय के भीतर आक्रोश और अलगाव की भावना को बढ़ावा देता है, जिन्हें लगता है कि उनके विश्वास को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। इसके साथ ही यह एक ऐसे देश में विभाजनकारी माहौल में योगदान देता है, जो अपने धर्मनिरपेक्ष और समावेशी मूल्यों पर गर्व करता है। पद्मावत (2018) जैसी फिल्मों को हिंदू राजपूत योद्धाओं के चित्रण के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा था, तो वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि फिल्म ने हिंदू नायकों की वीरता और गरिमा को कम करते हुए विरोधी का महिमामंडन किया है। इसी तरह, एक लोकप्रिय वेब सीरीज़, सेक्रेड गेम्स (2018) में त्रिशूल और भगवद गीता जैसे हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल ऐसे दृश्यों में किया गया था, जिन्हें कई लोगों ने अपमानजनक और भ्रामक पाया।

चुनिंदा तरीके से हिंदू परंपराओं को निशाना बनाना, जबकि अन्य धर्मों की आलोचना से बचना, हिंदूफोबिया के एक पैटर्न का सुझाव देता है, जिसे बॉलीवुड को संबोधित करने की जरूरत है। यह केवल रचनात्मक स्वतंत्रता का मामला नहीं है, बल्कि जिम्मेदार कहानी कहने का मामला है, जो सभी समुदायों की संवेदनशीलता का सम्मान करता है।

सम्मान और निष्पक्षता जरूरी

बॉलीवुड में हिंदू पात्रों और संस्कृति के चित्रण के लिए अधिक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। जबकि किसी भी धर्म के भीतर प्रथाओं की आलोचना और सवाल करना महत्वपूर्ण है, इसे सम्मान और निष्पक्षता के साथ किया जाना चाहिए। हिंदू धर्म को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना, जैसा कि 'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' और अन्य फिल्मों में देखा गया है, केवल सामाजिक विभाजन को गहरा करने और हानिकारक रूढ़ियों को बढ़ावा देने का काम करता है।

बॉलीवुड को भारत की विविधता को सही मायने में प्रतिबिंबित करने के लिए, यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी समुदायों को उस गरिमा और सम्मान के साथ चित्रित किया जाए, जिसके वे हकदार हैं। इंडस्ट्री का सार्वजनिक धारणा पर एक शक्तिशाली प्रभाव है, और उस शक्ति के साथ पूर्वाग्रह और पक्षपात को बनाए रखने से बचने की जिम्मेदारी आती है।

बॉलीवुड में हिंदूफोबिया पर बहस जारी है, इसलिए यह जरूरी है कि फिल्म निर्माता अपनी कहानी कहने में ज़्यादा ईमानदार नजरिया अपनाएं, जो समावेशिता और सभी धर्मों के सम्मान के मूल्यों को बनाए रखे।

नीचे दिए गए एक्स पोस्ट में बॉलीवुड की कई फिल्मों में से कुछ फिल्मों की लिस्ट है, जो दशकों से जानबूझकर हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश करती पाई गई हैं।

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