Vishwakhabram: क्या युद्ध की तैयारी में जुटा है North Korea? बेटी के साथ Tank पर बैठे नजर आये Kim Jong Un

By नीरज कुमार दुबे | Mar 20, 2026

क्या उत्तर कोरिया युद्ध की तैयारी कर रहा है? जब दुनिया का आधे से ज्यादा हिस्सा पहले ही संघर्षों में उलझा हुआ है, ऐसे में क्या किम जोंग उन एक और मोर्चा खोलकर वैश्विक संकट को और भड़का सकते हैं? हाल की तस्वीरें और घटनाक्रम इसी ओर इशारा करते नजर आते हैं। सत्ता, सैन्य शक्ति और उत्तराधिकार की कहानी अब टैंक के ऊपर से लिखी जा रही है और यह संकेत मामूली नहीं है।

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वैसे यह पहली बार नहीं है जब किम अपनी बेटी को इस तरह के सैन्य कार्यक्रमों में साथ ला रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में किम जु ए मिसाइल परीक्षण, गोलीबारी अभ्यास और हथियार कारखानों के दौरे में लगातार नजर आई हैं। वह राइफल और पिस्तौल चलाती भी दिखाई दीं। यह साफ संकेत है कि उन्हें केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जा रहा है।

अगर इस घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में देखें तो तस्वीर और भी गंभीर हो जाती है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने जापान सागर की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह कदम उस समय उठाया गया जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे। प्योंगयांग पहले ही चेतावनी दे चुका था कि इन अभ्यासों के गंभीर परिणाम होंगे। ऐसे में यह मिसाइल परीक्षण एक सीधा सैन्य संकेत था।

इधर पश्चिम एशिया में भी हालात विस्फोटक बने हुए हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और वहां के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक तनाव चरम पर है। ऐसे माहौल में किम का आक्रामक सैन्य प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह इस वैश्विक अस्थिरता को अवसर के रूप में देख रहे हैं।

रणनीतिक दृष्टि से देखें तो किम जोंग उन दो मोर्चों पर खेल रहे हैं। एक तो है सैन्य आधुनिकीकरण। उत्तर कोरिया लगातार अपने पारंपरिक और परमाणु हथियारों को उन्नत कर रहा है। नए टैंक, ड्रोन से बचाव की क्षमता, और लंबी दूरी की मिसाइलें इस रणनीति का हिस्सा हैं। इसके अलावा दूसरा मोर्चा है सत्ता का उत्तराधिकार। किम जु ए को सार्वजनिक मंचों पर लाकर वह दुनिया और अपने देश दोनों को यह संदेश दे रहे हैं कि सत्ता की अगली कड़ी तैयार है।

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है। किम की बहन किम यो जोंग, जो देश की दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत मानी जाती हैं, वह एक बड़ी चुनौती बन सकती हैं। उनके पास राजनीतिक और सैन्य दोनों तरह का समर्थन है। ऐसे में उत्तराधिकार की यह कहानी अंदरूनी सत्ता संघर्ष को भी जन्म दे सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है हालिया चुनाव। उत्तर कोरिया में हुए संसदीय चुनाव में किम की पार्टी को लगभग सौ प्रतिशत वोट मिले। हर सीट पर वही उम्मीदवार था जिसे सत्ता ने पहले से तय किया था। विपक्ष का कोई अस्तित्व नहीं था। केवल शून्य दशमलव शून्य सात प्रतिशत लोगों ने ना में वोट डाला। यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन दशकों बाद पहली बार इसे सार्वजनिक किया गया। यह भी एक तरह का संकेत है कि सत्ता अपनी पकड़ को दिखाने के साथ-साथ नियंत्रित पारदर्शिता का खेल भी खेल रही है।

अब सवाल यह है कि क्या यह सब केवल शक्ति प्रदर्शन है या वास्तव में युद्ध की तैयारी। जवाब सीधा नहीं है, लेकिन संकेत बेहद स्पष्ट हैं। जब एक नेता अपनी किशोर बेटी को टैंक चलाना सिखा रहा हो, जब मिसाइलें लगातार दागी जा रही हों और जब वैश्विक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हो, तब इसे केवल दिखावा मानना भूल होगी।

किम जोंग उन का यह कदम केवल अपने दुश्मनों को डराने के लिए नहीं है, बल्कि अपने देश के भीतर सत्ता की स्थिरता और निरंतरता का संदेश देने के लिए भी है। देखा जाये तो यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है, जो टैंक की गर्जना और मिसाइल की आग के साथ-साथ छवि और प्रतीक के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है।

दुनिया को अब यह समझना होगा कि उत्तर कोरिया केवल एक अलग थलग देश नहीं है, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी है जो सही समय का इंतजार कर रहा है। और जब वह समय आएगा, तो उसका असर केवल कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक संतुलन को भी हिला सकता है।

-नीरज कुमार दुबे

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