Health Tips: क्या बाईं करवट सोना वाकई पाचन के लिए बेस्ट है? Heartburn रोकने के लिए अपनाएं ये Health Tips

By अनन्या मिश्रा | Aug 22, 2026

दिनभर की थकान के बाद हर किसी के लिए सुकूनभरी और अच्छी नींद बेहद जरूरी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ कितने घंटे सोते हैं। यही नहीं आप किस पोजीशन में सोते हैं, इसका भी आपकी सेहत पर बड़ा असर हो सकता है। खासतौर हार्टबर्न और डाइजेशन जैसी समस्याओं में सोने की पोजीशन बेहद अहम भूमिका निभाती है। कई लोग रात में खाना खाने के बाद खट्टी डकार, सीने में जलन, एसिडिटी या पेट में भारीपन की शिकायत करते हैं।

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सोने की पोजीशन से भी पाचन और सीने में जलन की समस्या

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक भोजन के फौरन बाद ही पीठ के बल सीधे लेट जाना या फिर पूरी तरह से सपाट सोने से पेट का एसिड भोजन नली की तरफ वापस आने लगता है। जिस कारण खट्टी डकार, सीने में जलन और गले में जलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासकर उन लोगों को जिनको पहले से गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज है। उनमें यह समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती है।

कई बार पेट के बल सोने से भी पेट पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिस कारण पाचन संबंधी असुविधा बढ़ सकती है। इस कारण देर रात भारी खाना खाने के फौरन बाद लेटना सही आदत नहीं मानी जाती है।

पाचन के लिए सोने की सबसे अच्छी पोजीशन

पाचन और हार्टबर्न दोनों के लिए बाईं करवट लेकर सोना फायदेमंद माना जाता है। बाएं ओर करवट लेकर सोने से गुरुत्वाकर्षण की वजह से पेट का एसिड भोजन नली में वापस जाने की संभावना कम होती है। इससे एसिड रिफ्लक्स और सीने की जलन की समस्या नहीं होती है। वहीं कुछ लोगों के लिए सिर और कंधों को थोड़ा ऊंचा रखकर सोना भी फायदेमंद होता है। 

ऐसा करने से पेट का एसिड ऊपर की ओर नहीं आता है और फिर रात में हार्टबर्न की शिकायत भी कम हो सकती है। लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। इसलिए यदि किसी को लगातार समस्या बनी रहती है, तो उसको फौरन डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।

वहीं बाएं ओर करवट लेकर रात में सोने से एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। इससे हार्टबर्न और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। इससे नींद और क्वालिटी बेहतर होती है। लेकिन अगर बार-बार एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, तो सिर्फ सोने की पोजीशन को चेंज करने पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिएष बल्कि डॉक्टर की सलाह और इलाज भी जरूरी है।

हार्टबर्न से कैसे करें बचाव

रात को सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। जिससे कि भोजन को पचने का समय मिल सके। राज में ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और ज्यादा तेल वाले खाने से परहेज करना चाहिए। वहीं शराब, कैफीन और धूम्रपान जैसी आदतों की वजह से भी एसिड रिफ्लैक्स को बढ़ा सकती है। अगर वेट ज्यादा है, तो उसको भी कंट्रोल करें। क्योंकि मोटापा पेट पर दबाव बढ़ाकर हार्टबर्न की समस्या को बढ़ा सकता है।

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