By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 07, 2026
मुंबई, सात अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा योजना पर केंद्रीय बैंक द्वारा वहन की जाने वाली ‘हेजिंग’ लागत की तुलना में अर्थव्यवस्था को मिलने वाला लाभ अधिक महत्वपूर्ण है। विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और भुगतान संतुलन को स्थिर करने के लिए आरबीआई ने इस साल जून में बैंकों के लिए एक विशेष विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा की घोषणा की थी। इसके तहत ऋणदाताओं को एफसीएनआर (बी) खातों में जमा पर ब्याज दरें बढ़ाने की अनुमति मिली थी।
विश्लेषकों ने अनुमान जताया कि यह लागत सालाना लगभग 2.8 से 3.0 प्रतिशत तक हो सकती है। लागत को देखते हुए इस योजना के औचित्य पर भी सवाल किए गए। मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, एफसीएनआर-बी जमा के तहत भारतीय रिजर्व बैंक पर आने वाली लागत को लेकर भी कुछ सवाल हैं।
लेकिन यह हमारा प्राथमिक उद्देश्य नहीं है। मैं सभी से अर्थव्यवस्था को होने वाले समग्र लाभ को देखने का अनुरोध करूंगा। आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि एफसीएनआर-बी जमा के पुनर्भुगतान से जुड़े जोखिम नियंत्रण में रहेंगे।
उन्होंने कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी क्षेत्र में अपेक्षित सुधार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि चालू खाते पर हालिया दबाव और बाहरी प्रवाह में आई नरमी अस्थायी है और बाहरी क्षेत्र में जल्द ही सुधार होगा।