By अभिनय आकाश | Jan 21, 2026
भारत ने मंगलवार को बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को एहतियाती कदम के तौर पर घर लौटने की सलाह दी है। देश में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय सुरक्षा उपाय के तौर पर लिया गया है और इससे बांग्लादेश में भारतीय राजनयिक मिशनों के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकारी सूत्रों ने बताया, सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, एहतियात के तौर पर हमने दूतावास और दूतावास के अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है। सूत्रों ने आगे कहा कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश में अन्य सभी भारतीय दूतावास खुले हैं और पूरी तरह से कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि राजनयिक कार्य और सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।
बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया कि उनके पति या फिर पत्नी और बच्चों को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें इसके लिए अतिरिक्त 7 दिन का समय भी दिया गया था। जिसके परिणाम स्वरूप पिछले गुरुवार यानी कि 15 जनवरी तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को बेहद कम समय के नोटिस पर भारत लौटना पड़ा है। हालांकि बता दें कि भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस फैसले को लेकर कोई भी सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। भारत के इस फैसले से बांग्लादेश में कैसे भूचाल ला दिया है और कैसे एक तीर से कई निशाने भेद कर दिए गए हैं। पहला यूनुस की साजिश को पूरी तरीके से फ्लॉप कर दिया गया है क्योंकि चुनाव से पहले कट्टरपंथी वामपंथी ब्रिगेड पूरी तरीके से बांग्लादेश में एक्टिव है।
बांग्लादेश में चुनाव ना हो और चुनाव में अड़चन आए इसके लिए यूनुस हिंदुओं और भारतीय राजनीतिकों को टारगेट करवा सकता था। ऐसे में भारत ने पहले ही खतरे की आहट को परख लिया और यूनुस की साजिश को पूरी तरह से धराशाई करने के लिए यह फैसला लिया। दूसरा एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि भारत का यह कदम बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा की स्थिति और खराब होने की आशंकाओं के कारण उठाया गया है।