क्या गुजरात के जरिए भाजपा मुख्यमंत्रियों को दे रही है सबक ? गुटबाजी नहीं होगी बर्दाश्त

By अनुराग गुप्ता | Sep 13, 2021

नयी दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए पिछले छह महीने के भीतर तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदल दिया है। दरअसल, भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। ऐसे में कर्नाटक, उत्तराखंड और फिर गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन करके वहां भाजपा के खिलाफ पनप रहे विरोध को समाप्त करने की कोशिश की है। 

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क्या है बदलाव की वजह ?कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर पार्टी कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती है। क्योंकि पार्टी समझती है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव को प्रभावित करेंगे। ऐसे में विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में कोई भी कमी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में पार्टी अंतर्कलह को समाप्त करने की कोशिशें कर रही है। वहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि भाजपा ने आंतरिक सर्वे कराया था, जिसके आधार पर वो पार्टी को दुरुस्त करने में लगी हुई है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा अपनी पहचान को बदलना चाहती है। एक वक्त था जब नेता की वजह से पार्टी की पहचान होती थी लेकिन भाजपा इस दिशा की तरफ आगे नहीं बढ़ना चाहती है। भाजपा अब नए नेतृत्व को तैयार कर रही है। पार्टी का मानना है कि उसकी वजह से नेताओं की पहचान हो। इसके अलावा पार्टियों में गुटबाजी भी काफी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में आलानेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि मिलकर एकजुट होकर काम करो, गुटबाजी बर्दाश्त के बाहर है।

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