Mumbai की छह लोकसभा सीटों पर क्या सत्तारुढ़ Shivsena-BJP-NCP के लिए इस बार फँस गया है मामला?

By नीरज कुमार दुबे | May 06, 2024

मुंबई में छह संसदीय क्षेत्रों में राजनीतिक लड़ाई का मैदान सज चुका है और दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप के तीर एक दूसरे पर चलाये जा रहे हैं। छह में से तीन सीटों पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना आमने सामने हैं तो बाकी की तीन सीटों में से दो पर भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से होगा और एक सीट पर भगवा पार्टी शिवसेना (यूबीटी) से भिड़ेगी। हम आपको बता दें कि मुंबई में छह निर्वाचन क्षेत्र हैं- मुंबई दक्षिण, मुंबई दक्षिण-मध्य, मुंबई उत्तर, मुंबई उत्तर-मध्य, मुंबई उत्तर-पूर्व और मुंबई उत्तर-पश्चिम। मुंबई की छह सीटें महाराष्ट्र की उन 13 सीटों में से हैं जिन पर 20 मई को पांचवें और अंतिम चरण में मतदान होगा।

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इसके अलावा, कांग्रेस विधायक वर्षा गायकवाड़, जो पार्टी की मुंबई इकाई की अध्यक्ष भी हैं वह मुंबई उत्तर-मध्य में भाजपा द्वारा मैदान में उतारे गए प्रसिद्ध वकील उज्ज्वल निकम के खिलाफ लड़ रही हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता पीयूष गोयल मुंबई उत्तर में कांग्रेस के भूषण पाटिल से मुकाबला करेंगे। हम आपको बता दें कि वर्षा गायकवाड़ जहां मुंबई में धारावी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, वहीं पीयूष गोयल राज्यसभा सदस्य हैं। इसके अलावा, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट में भाजपा के मिहिर कोटेचा का मुकाबला शिवसेना यूबीटी के संजय दीना पाटिल से होगा। हम आपको बता दें कि मिहिर कोटेचा मुंबई के मुलुंड विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

हम आपको बता दें कि मुंबई उत्तर-मध्य से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद, वर्षा गायकवाड़ ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। इस दौरान उद्धव ने उन्हें अपना समर्थन देने का वादा किया और कहा कि उन्हें एक सांसद के रूप में दिल्ली भेजा जाएगा। यहां एक रोचक बात यह है कि यह पहली बार होगा कि ठाकरे किसी कांग्रेस उम्मीदवार को वोट देंगे क्योंकि बांद्रा स्थित उनका आवास मुंबई उत्तर-मध्य निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। गौरतलब है कि कांग्रेस और शिवसेना 2019 तक मुंबई में पारंपरिक रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। वैसे प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद, दोनों पार्टियां सत्ता में पद पाने के लिए कई मौकों पर रणनीतिक साझेदारी करती रही हैं खासकर मुंबई नगर निकाय में। 2019 में उद्धव ठाकरे के पाला बदलने के बाद से तो दोनों दलों के बीच अच्छी दोस्ती देखने को मिल रही है।

मुंबई में विभिन्न राजनीतिक दलों की जमीनी स्थिति की बात करें तो 2014 के बाद से कांग्रेस मुंबई की सभी लोकसभा सीटें हारी है जबकि 2019 के विधानसभा चुनाव में वह यहां की 36 में से केवल पांच सीटें ही जीत सकी थी। मुंबई दक्षिण के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा के शिवसेना में चले जाने और मुंबई उत्तर-मध्य की पूर्व सांसद प्रिया दत्त के दोबारा चुनाव लड़ने से इंकार करने के कारण, कांग्रेस के पास मैदान में उतारने के लिए कोई उम्मीदवार नहीं था। पार्टी नेता संजय निरुपम वहां से लड़ना चाहते थे लेकिन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में समान सीट-बंटवारा करा पाने में असमर्थ रहे कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना के लिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

भाजपा ने सभी तीन मौजूदा सांसदों को बदल दिया है, जबकि शिंदे की शिवसेना ने केवल राहुल शेवाले (मुंबई दक्षिण-मध्य) को फिर से नामांकित किया है। मुंबई उत्तर-पश्चिम के चुनावों में अजीब स्थिति देखने को मिल रही है क्योंकि शिवसेना ने यहां से गजानन कीर्तिकर की जगह रवींद्र वायकर को उतारा है। खास बात यह है कि गजानन कीर्तिकर के बेटे अमोल कीर्तिकर को इस सीट से शिवसेना यूबीटी ने टिकट दिया है लेकिन गजानन कीर्तिकर का कहना है कि वह राजधर्म का पालन करते हुए अपने बेटे के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। 

दूसरी ओर, हमने अपनी चुनाव यात्रा के दौरान महसूस किया कि ज़मीनी स्तर पर जो तस्वीर उभर रही है, उसके अनुसार, शिव सेना (यूबीटी) और कांग्रेस कैडर के बीच ज़मीनी स्तर पर अच्छी पकड़ हो गई है और इनके कार्यकर्ता मिल कर काम करते दिख रहे हैं लेकिन चुनाव प्रबंधन के मामले में यह भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति से पीछे हैं। महायुति में शामिल भाजपा, शिवसेना और एनसीपी जिस तरह सधे हुए अंदाज में चुनाव प्रचार चला रहे हैं उसका असर हर जगह दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा भी मुंबई में रखवाई जा रही है जिससे चुनाव प्रचार की दशा और दिशा ही बदल जायेगी। इसके अलावा भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने मुंबई आकर बुद्धिजीवियों, प्रोफेशनल्स और समाज के विभिन्न वर्गों की अलग-अलग बैठकें कर उनको यह समझाना शुरू कर दिया है कि क्यों देश के लिए तीसरी बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व जरूरी है। हमने सभी संसदीय क्षेत्रों में लोगों से बात की। इस दौरान सभी ने एक बात कही कि आप जहां भी जाएंगे वहां निर्माण कार्य होते हुए पाएंगे। लोगों ने कहा कि मुंबई की जरूरतों को समझ कर जिस तरह यहां विकास की परियोजनाएं लाई गयी हैं उससे आने वाले समय में सबको बड़ा फायदा होगा इसलिए हम समझते हैं कि यह सरकार चलती रहनी चाहिए। महिलाओं से तो हमने जहां भी बात की वहां पर सभी ने मोदी मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिये।

देखा जाये तो 2024 के लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र के लिए भी बड़े मायने रखते हैं क्योंकि 2019 में हुए राजनीतिक फेरबदल के बाद यह पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होगी। लेकिन इस परीक्षा के दौरान जिस तरह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा हावी है वह दर्शा रहा है कि सत्तारुढ़ गठबंधन एक बार फिर सभी सीटों पर विजय हासिल कर सकता है। वैसे तो महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच सीधी टक्कर होनी है लेकिन जिस तरह मुंबई उत्तर मध्य के चुनावी मैदान में एआईएमआईएम तथा यूपी स्थित राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल (आरयूसी) ने मुंबई उत्तर मध्य और मुंबई उत्तर पूर्व से मोहम्मद सिराज इकबाल शेख को भी मैदान में उतारा है उससे भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा होना निश्चित है जिससे भगवा पार्टी की राह आसान हो जायेगी।

हम आपको बता दें कि मुंबई को मुंबई शहर और मुंबई उपनगरीय जिले में विभाजित किया गया है। मुंबई दक्षिण और मुंबई दक्षिण-मध्य निर्वाचन क्षेत्र मुंबई शहर में हैं, जबकि बाकी निर्वाचन क्षेत्र मुंबई उपनगरीय क्षेत्रों में हैं। मुंबई शहर में 24 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि उपनगरीय क्षेत्रों में 74 लाख मतदाता हैं।

-नीरज कुमार दुबे

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