By अभिनय आकाश | Mar 11, 2026
दुनिया में आजकल युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि आसमान और अंतरिक्ष के करीब भी लड़े जा रहे हैं। आधुनिक हथियारों की दौड़ में कई देश ऐसी मिसाइलें बना चुके हैं जिन्हें रोकना लगभग नामुमकिन माना जाता है। इसी तरह की एक मिसाइल इजराइल की ब्लू स्पैरो है। यह मिसाइल इस समय दुनिया के कई रक्षा एक्सपर्टों के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द बन चुकी है क्योंकि कहा जाता है कि इसके सामने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी कई बार बेबस हो जाते हैं। आखिर ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में कि यह दुश्मन के सबसे मजबूत रक्षा कवच को भी चकमा दे देती है।
इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह अचानक अपने लक्ष्य की दिशा में नीचे की ओर गिरती है। यहीं पर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे बड़ी समस्या पैदा हो जाती है। दरअसल ज्यादातर रडार सिस्टम क्षितिज यानी कि सामने की दिशा में आने वाले खतरे को स्कैन करते हैं। वे जमीन के समानांतर उड़ने वाली मिसाइलों को पकड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं। लेकिन जब कोई मिसाइल ऊपर से लगभग 90 डिग्री के कोण पर सीधे नीचे गिरती है तो रडार के लिए उसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। रडार के ठीक ऊपर एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां तकनीकी भाषा में ब्लाइंड स्पॉट कहा जाता है। इस ब्लाइंड स्पॉट में आने वाली चीजों को रडार तुरंत पहचानता नहीं है। ब्लू स्पेरो इसी कमजोरी का फायदा उठाता है। जब तक एयर डिफेंस सिस्टम को समझ में आता कि ऊपर से कोई खतरा आ रहा है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और यही वजह है कि इस मिसाइल को रोकना बेहद नामुमकिन माना जाता है।
इस मिसाइल की रफ्तार हाइपरसोनिक स्तर तक पहुंच सकती है। यानी यह ध्वनि की गति से कई गुना तेज चलती है। जब यह अंतरिक्ष जैसी ऊंचाई से नीचे गिरती है। गुरुत्वाकर्षण और इसकी खुद की गति मिलकर इसे और भी तेज बना देते हैं। इसकी स्पीड इतनी ज्यादा होती है कि दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिज्ञा देने का भी लगभग कोई समय नहीं होता है। यानी मिसाइल का पता चलने और उसे रोकने के बीच का समय बेहद कम होता है और इसी वजह से इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है। इस मिसाइल की एक और खासियत इसका लॉन्च प्लेटफार्म है। ब्लू स्पेरो को जमीन से लॉन्च नहीं किया जाता है। इसे हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमान से छोड़ा जाता है। खासतौर पर F15 ईगल जैसे शक्तिशाली फाइटर जेट से इसे लॉन्च किया जाता है।
ब्लू स्पैरो की परिचालन क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर है। इसे मूल रूप से इज़राइल की एरो रक्षा प्रणाली के लिए दुश्मन के बैलिस्टिक खतरों का अनुकरण करने के लिए बनाया गया था। यह हथियार अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करता है, जिससे पारंपरिक हवाई रक्षा नेटवर्क द्वारा इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसकी अद्वितीय परिचालन क्षमता इसे भविष्य के गहन हमलों के लिए एक प्रमुख सामरिक विकल्प बनाती है।
12 घंटों में लगभग 900 हमलों की शुरुआती बौछार के बाद, क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ गया है। ईरान ने तुरंत सैकड़ों मिसाइलों और हजारों ड्रोनों से जवाबी कार्रवाई की। ईरानी सेना ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है। जैसे-जैसे युद्ध एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रहा है, इज़राइल शेष बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए अधिक उन्नत मिसाइलों को तैनात कर सकता है।
पाश्चर स्ट्रीट परिसर के विनाश के बाद ईरान वर्तमान में अपने राजनीतिक नेतृत्व का पुनर्गठन कर रहा है। नए शीर्ष कमांडर संभवतः हवाई हमलों से बचने के लिए भूमिगत बंकरों में ही रहेंगे। इज़राइल भारी सुरक्षा वाले भूमिगत ठिकानों में घुसपैठ करने के लिए ब्लू स्पैरो या उसके सटीक हमले वाले संस्करण रॉक्स पर निर्भर हो सकता है। हालांकि, इस तरह के हमले में भारी सामरिक जोखिम शामिल हैं। एक निश्चित अंत की संभावना अभी भी अनिश्चित है। यह अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है कि क्या इज़राइल युद्ध समाप्त करने के लिए एक और ब्लू स्पैरो मिसाइल दागेगा। अमेरिका रक्षात्मक रुख अपनाते हुए ईरानी जवाबी हमलों से सक्रिय रूप से बचाव कर रहा है। यदि ईरान सहयोगी बलों पर अपने ड्रोन हमलों को तेज करता है तो एक और हथियार तैनाती हो सकती है। इसके विपरीत, यदि मौजूदा गुप्त राजनयिक प्रयासों से अचानक युद्धविराम हो जाता है तो हमला नहीं भी हो सकता है।