हड्डियां जलाने वाले गोले दागे, एक पायलट की तलाश में लेबनान के कब्रिस्तान क्यों खोद रहा इजरायल?

इजराइली लड़ाकू विमानों ने इलाके पर हवाई हमले किए जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। लेबनीज़ आर्मी और मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के मुताबिक इस लड़ाई में तीन लेबनानी सैनिक और बेकावे वैली के 41 रेजिडेंट्स मारे गए हैं। वहीं इजराइली सैनिकों के घायल होने की कोई खबर अब तक नहीं मिली है।
कुछ ही दिन पहले ईस्टर्न लेबनान में देर रात एक ड्रामेटिक मिशन के दौरान इजराइल की स्पेशल फोर्सेस ने एक गांव में तलाशी शुरू की। किसी आम जगह या घर की नहीं बल्कि एक कब्रिस्तान की। मिशन था 40 साल से लापता एक इजराइली पायलट की कब्र और उनके अवशेष खोजना। पर इजराइल का ऑपरेशन रातोंरात असफल हो गया। ऑपरेशन के दौरान इजराइयली कमांडोज़ और हिजबुल्ला के लड़ाकों के साथ-साथ कुछ लोगों के बीच गोलीबारी हो गई। इसके बाद इजराइली लड़ाकू विमानों ने इलाके पर हवाई हमले किए जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। लेबनीज़ आर्मी और मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के मुताबिक इस लड़ाई में तीन लेबनानी सैनिक और बेकावे वैली के 41 रेजिडेंट्स मारे गए हैं। वहीं इजराइली सैनिकों के घायल होने की कोई खबर अब तक नहीं मिली है।
सफेद फॉस्फोरस के गोले दागे
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका ईरान युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे उसका अमानवीय पक्ष सामने आ रहा है। अब लेबनान के मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर आरोप लगाया है कि इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर कस्बे के रिहायशी इलाके पर सफेद फॉस्फोरस के गोले दागे, जिससे घरों और कारों में आग लग गई और लोग झुलस गए। संगठनों ने वीडियो और फोटो जारी कर दावा किया कि 3 मार्च के हमले में हवा में फटने वाले सफेद फॉस्फोरस के गोले इस्तेमाल किए गए, जिनसे जलते कण बड़े इलाके में फैल गए। ह्युमन राइट्स वॉच ने 7 तस्वीरों को सत्यापित किया है, जिनमें रिहायशी इलाके के ऊपर गोले फटते दिखाई देते हैं। संगठन ने कहा कि आबादी वाले इलाकों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल इंसानियत के खिलाफ है।
सफेद फॉस्फोरस क्या है कितना खतरनाक है?
सफेद फॉस्फोरस बेहद ज्वलनशील रासायनिक पदार्थ है, जो ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही तुरंत जल उठता है। जलने पर इसका तापमान 800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है और हड्डी तक जला देता है। हवा में फटने पर यह 125 से 250 मीटर के दायरे में सैकड़ों जलते कण फैला देता है। इससे त्वचा और मांस गंभीर रूप से जल सकते हैं, जहरीला धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और घर, खेत व वाहन में आग लग सकती है।
पहले कहां इस्तेमाल हुआ, क्यों लगा प्रतिबंध
अमेरिका पर 2004 में इराक के फलूजा युद्ध में सफेद फॉस्फोरस इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे। इजराइल ने 2008 से 2009 गाजा युद्ध में इसके इस्तेमाल की बात मानी थी। 2023 में भी इजराइल पर गाजा और लेबनान में भी ऐसे हमलों के आरोप लग चुके हैं। 1980 में संयुक्त राष्ट्र के प्रोटोकॉल-III के तहत आग लगाने वाले हथियारों के इस्तेमाल पर कड़े नियम बने। आबादी वाले क्षेत्रों में इनका उपयोग प्रतिबंधित है। सफेद फॉस्फोरस पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन नागरिक इलाकों में इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
इजरायल किसकी कर रहा तलाश
लेबनीज़ आर्मी के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 10:00 बजे दो इजराइली हेलीकॉप्टर सीरिया लेबनान सीमा पर बेकावे वैली में स्थित नबीचित और क्राइबे कस्बों के पास लैंड हुए। जिनसे इजराइली सैनिकों को नीचे उतारा गया। इसके बाद सैनिक नबीचित के कब्रिस्तान में पहुंचे और एक कब्र की खुदाई शुरू कर दी। उन्हें यहां पर शक हुआ था कि वहां 1986 में लेबनान में लापता हुए इजराइली पायलट रॉन अराद के अवशेष दफन मिल सकते हैं। कई न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में एक कब्र के पास ताजा खुदी हुई मिट्टी दिखाई दी। उस जगह थोड़ी देर के लिए खुदाई की गई थी और फिर इजरायली फोर्सेस वहां से वापस लौट गई। द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब इजराइयली हेलीकॉप्टर इलाके में उतरे तो लेबनी सेना ने इस घुसपैठ का पता लगा लिया और हेलीकॉप्टरों के ऊपर फ्लेयर डाली। इसके बाद इजराइयली सैनिकों, स्थानीय लोगों और हिजबुल्ला के लड़ाकों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई।
40 साल पुरानी गुमशुदगी के चक्कर में लेबनान खोद रहा इजरायल
आईडीएफ यानी कि इजराइयली डिफेंस फोर्सेस ने इस दौरान शहर पर कम से कम 40 हवाई हमले किए। ऑन ग्राउंड इजराइली सैनिकों, स्थानीय लोगों और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई चलती रही जो सुबह करीब 3:00 बजे तक जारी रही। द गार्डियन की एक रिपोर्ट बताती है घटना के वीडियो में लगातार गोलीबारी दिखाई दी जिसमें आसमान में ट्रेसर बुलेट साफ नजर आ रही थी। साल 1986 में इजराइल और लेबनान के उग्रवादी संगठन हज़बुला के बीच लड़ाई हुई थी और इसके दौरान लेबनान के ऊपर से उड़ता हुआ एक इजराइली एयरक्राफ्ट एफ4 फैंटम टू फाइटर बम्बर मार गिराया गया था। इस एयरक्राफ्ट के नेविगेटर रॉन अराध थे और पायलट यशाई अविराम। अविराम सेफ रिजेक्ट हो गए थे। जिन्हें बाद में इजरयली फोर्सेस ने रेस्क्यू भी कर लिया था। पर इस घटना के बाद अराध लापता हो गए। कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि एयरक्राफ्ट क्रैश होने के बाद रॉन को शिया मिलिशिया अमाल मूवमेंट ने पकड़ लिया और बाद में हिजबुल्ला को सौंप दिया गया था। लेट 1980 के बाद से उनके जिंदा होने का कोई सबूत सामने नहीं आया है। 2004 में इजराइल के गवर्नमेंट कमीशन ने कंक्लूड भी किया था कि रॉन अराध की मौत मिड 1990 में हो चुकी थी। इसके बावजूद इजरयली सरकार उनके अवशेष ढूंढने की कोशिश करती रही है। 2021 में उस समय के प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट ने कहा था कि इजराइली इंटेलिजेंस ने ईरान के एक जनरल को सीरिया से अगवा किया था ताकि अराद के बारे में कुछ जानकारी मिल सके। लेबनान रीजन में यह आमतौर पर माना जाता है कि विमान दुर्घटना के कुछ समय बाद रॉन अराध की मौत हो गई थी और उन्हें बेका वैली के किसी इलाके में दफन कर दिया गया था। हालांकि उनकी कब्र की सही जगह कहां है? आज तक यह कंफर्म नहीं हो पाया है।
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