By Ankit Jaiswal | Jul 28, 2026
भारतीय निशानेबाजी टीम ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के नाम एक और पदक दर्ज कराया है। चीन के हांगझोउ में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में भारत की सोनम उत्तम मस्कर और हिमांशु ढिल्लों की जोड़ी ने 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया है।
बता दें कि इस स्पर्धा में मेजबान चीन का दबदबा देखने को मिला। चीन की पहली टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन की दूसरी टीम ने रजत पदक पर कब्जा जमाया। इसके बावजूद भारतीय जोड़ी ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और पदक तालिका में भारत की स्थिति को और बेहतर बनाया है।
गौरतलब है कि आईएसएसएफ विश्व कप विश्व स्तर की सबसे प्रतिष्ठित निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में शामिल है। इस प्रतियोगिता में दुनिया के कई शीर्ष निशानेबाज हिस्सा लेते हैं और यहां का प्रदर्शन आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तथा बड़े बहु-खेल आयोजनों की तैयारियों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों का लगातार पदक जीतना देश की बढ़ती ताकत का संकेत माना जा रहा है।
भारतीय निशानेबाजी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। युवा खिलाड़ियों के साथ-साथ अनुभवी निशानेबाजों की मेहनत और वैज्ञानिक प्रशिक्षण का असर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि भारत अब लगभग हर बड़े निशानेबाजी टूर्नामेंट में पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।
इस ताजा सफलता के बाद हांगझोउ में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में भारत के कुल पदकों की संख्या चार हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय दल अब तक एक स्वर्ण पदक, एक रजत पदक और दो कांस्य पदक अपने नाम कर चुका है। यह प्रदर्शन प्रतियोगिता में भारतीय टीम की निरंतरता और संतुलित खेल को दर्शाता है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के परिणाम खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए भी सकारात्मक संकेत हैं। बता दें कि विश्व कप जैसे मंच पर पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव भी बढ़ता है।
भारतीय दल से अब भी प्रतियोगिता के शेष मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ी इसी लय को बनाए रखते हैं तो भारत के पदकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। फिलहाल सोनम उत्तम मस्कर और हिमांशु ढिल्लों की इस उपलब्धि ने देश के खेल प्रेमियों को गर्व का एक और अवसर दिया है और भारतीय निशानेबाजी की मजबूत होती पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से साबित किया है।