By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 27, 2022
इस विशाल भूभाग के हृदय स्थल यानी उत्तर प्रदेश की 99.4 प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहां वायु प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से ज्यादा है। वैज्ञानिकों द्वारा हवा की खराब गुणवत्ता को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त किए जाने के बावजूद, यह चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बनता, इस बारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजप) की प्रदेश इकाई के वरिष्ठ नेता और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जे पी एस राठौर ने पीटीआई- से कहा, ‘‘जनता को जो मुद्दे अच्छे लगते हैं, उन्हीं को आगे बढ़ाना पड़ता है। पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा कायदे से 10 साल बाद जनता का मुद्दा बनेगा। अभी तो रोजगार और विकास ही लोगों के लिए प्रमुख मुद्दे हैं। एक प्रमुख राजनीतिक दल होने के बावजूद भाजपा द्वारा जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे को राजनीतिक विमर्श का मुद्दा नहीं बनाए जाने के सवाल पर राठौर ने कहा, ‘‘हम इसके प्रति गंभीर हैं और जमीनी स्तर पर ठोस काम कर रहे हैं। मगर अभी यह जनता का मुद्दा नहीं बन पाएगा, क्योंकि उसके लिए फिलहाल दूसरी चीजें जरूरी हैं। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा, जब देश के प्रधानमंत्री विरोधी दलों को आतंकवाद से जोड़कर चुनाव को दूसरा मोड़ देने की कोशिश करेंगे, तो जलवायु परिवर्तन का मुद्दा कहां टिक पाएगा। उन्होंने कहा कि जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो उसने अपने घोषणापत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के कई वादे किए हैं, जिन्हें सरकार में आने पर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि ‘वायु गुणवत्ता सूचकांक’ में अब भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहर प्रदूषण के मामले में शीर्ष पर हैं। इनमें कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद प्रमुख हैं।
नागपुरे ने कहा, ‘‘अगर हम वास्तविक रूप से धरातल पर देखें और आम लोगों से उनकी शीर्ष पांच समस्याओं के बारे में पूछें तो पाएंगे कि प्रदूषण का मुद्दा उनमें शामिल नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, हम उस हिसाब से लोगों को इस बारे में बता नहीं पा रहे हैं। यह सबसे बड़ा कारण है। जिस दिन प्रदूषण का मुद्दा जन चर्चा और जन सरोकार का मुद्दा बनेगा, उसी दिन यह एक राजनीतिक मुद्दा भी बन जाएगा और राजनीतिक दल इसे अपने घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल करने को मजबूर हो जाएंगे।’’ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉक्टर सीमा जावेद ने कहा कि जनता के बीच जितनी जानकारी पहुंचती है, लोगों में उतनी ही ज्यादा जागरूकता फैलती है। उन्होंने कहा कि तंबाकू के खिलाफ चलाए गए अभियान में लोगों को काफी हद तक यह विश्वास दिला दिया गया कि तंबाकू से कैंसर होता है और इसका परिणाम यह हुआ कि लोगों ने तंबाकू के इस्तेमाल से परहेज करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता फैलने की वजह से ही कानूनी बंदिशें लागू की गईं कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं कर सकता, यानी जब कोई मुद्दा जन सरोकार का मुद्दा बनता है तभी नेता उसे प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का वोट बैंक आमतौर पर ग्रामीण लोग होते हैं इसलिए जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता को ग्रामीण स्तर तक ले जाना होगा ताकि उस स्तर पर भी प्रदूषण का मुद्दा जन जन का मुद्दा बने। तभी इस दिशा में एक व्यापक बदलाव आएगा और यह एक राजनीतिक मुद्दा बन सकेगा।