यह केवल भाजपा की सरकार बनाए रखने का नहीं, लुटेरों को सबक सिखाने का चुनाव है

By दिनेश शुक्ल | Jul 06, 2020

भोपाल। आने वाले चुनाव केवल भाजपा की सरकार बनाए रखने के लिए नहीं है, बल्कि जिन लोगों ने जनता का पैसा लूटा है,  उनको सबक सिखाने का चुनाव है। चुनाव का मुद्दा केवल भाजपा की प्रतिष्ठा नहीं है,  इस चुनाव का मुद्दा जनता की प्रतिष्ठा है, प्रदेश की प्रगति है। यह संदेश हमें जनता तक ले जाना है और उसे बताना है कि 15 महीने की सरकार में जनता को क्या मिला। क्या किसानों की कर्जमाफी हुई ? क्या कोई सड़क बनी, क्या किसी को रोजगार भत्ता मिला?  जो दुख में साथी नहीं बन पाए,  वह सुख में क्या साथी बनेंगे ? इस बात को हमें जन-जन तक ले जाना है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को वर्चुअल रैली के माध्यम से प्रदेश के मुंगावली एवं बमौरी विधानसभा के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। 

 

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वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती है, जिन्होंने भारत की राजनीति को एक नई दिशा देने का काम किया था। डॉ. मुखर्जी के नेतृत्व में हम आगे बढ़े। पं. नेहरू की सरकार ने जब कश्मीर में धारा 370 को लागू किया, तो  सरदार पटेल से लेकर डॉ. मुखर्जी तक ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कहा कि एक देश में दो विधान,  दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे। डॉ. मुखर्जी ने सरकार से इस्तीफा दे दिया और जनसंघ की स्थापना की। उस समय पं. नेहरू ने कहा कि था कि मैं जनसंघ को कुचलकर रख दूंगा, तब डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि मैं जनसंघ को कुचलने के विचार को ही कुचल दूंगा। कांग्रेस की मानसिकता हमेशा कुचलने की रही है। शर्मा ने कहा कि धारा 370 हटाने के लिए डॉ. मुखर्जी ने अपना बलिदान दे दिया। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस विचार के लिए अपना बलिदान दिया, जिस विचार के लिए जनसंघ की स्थापना हुई। मुझे यह बताते हुए गर्व होता है कि उसी विचार से शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी आज दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है।   

 

विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि एक उद्योगपति, जो गलती से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे, वो कांग्रेस की बैठक में कह रहे थे कि अब हमारा टारगेट भारतीय जनता पार्टी का संगठन होगा। मैं कहना चाहता हूं, कमलनाथ जी और दिग्विजय सिंह जी आप याद कर लो, मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के एक करोड़ से ऊपर कार्यकर्ता हैं और पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता बूथ पर बैठकर आप का चैलेंज स्वीकार करने के लिए तैयार है। शर्मा ने कहा कि  इंदिरा गांधी ने जब इमरजेंसी लगाई थी, तो राजमाता जी को जेल में डाल दिया था। तब राजमाता जी ने कहा था कि मैं इससे डिगने वाली नहीं हूं और यह इमरजेंसी जिसने लगाई है,  वह जेल के अंदर होंगे। बाद में इमरजेंसी हटी, जो नेता और कार्यकर्ता जेल में थे, वो बाहर आए और इंदिरा गांधी जेल गयी। 

 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया में सबसे अधिक झूठ बोलने वाले व्यक्ति दिग्विजय सिंह हैं, जिन्हें प्रदेश का हर नागरिक मि. बंटाढार के रूप में जानता है। 2003 के पूर्व जब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब क्या हालत हो गई थी प्रदेश की। किसान से लेकर सभी वर्गों के लोग पीड़ित थे। इसके बाद सत्ता का परिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार बनी। भाजपा की सरकार ने सुश्री उमा भारती जी, शिवराज जी और अन्य मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में प्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने के लिए काम शुरू किया। किसान, नौजवान, माताएं बहनें, गरीब आदि हर वर्ग के लिए भाजपा की सरकारों ने जो काम करने का प्रयास किया,  उसका परिणाम यह हुआ प्रदेश स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनने की राह पर चल पड़ा। लोगों को सड़क, बिजली, पानी की सुविधाएं मिली। स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए गांव गांव में सड़कों का जाल बिछा दिया। सरकार के सहयोग और किसानों की मेहनत से मध्यप्रदेश के किसानों ने 5 साल लगातार कृषि कर्मण अवार्ड जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया।

 

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शर्मा ने कहा कि इसके बाद 2018 में कांग्रेस के कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने जनता से झूठ बोलकर फिर सरकार बना ली। मुख्यमंत्री कमलनाथ थे, लेकिन पर्दे के पीछे से सरकार दिग्विजयसिंह चला रहे थे। इस सरकार ने गरीब जनता के कल्याण के लिए भाजपा सरकार ने 15 सालों में जो योजनाएं शुरू की थीं, उन्हें बंद कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीबों को छत देने की योजना शुरू की, लेकिन कमलनाथ सरकार ने योजना के 2 लाख 43 हजार घर वापस कर दिए। बेटियों के हाथ पीले करने के लिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार 25000 रूपए देती थे,  कमलनाथ जी ने कहा कि हम 51 हजार रूपए देंगे। लेकिन उन्होंने भांजियों से भी झूठ बोला और किसी को 51000 रुपये नहीं दिये। भांजियों से किए गए इसी धोखे का परिणाम है कि वह धोखेबाज सरकार ही चली गई। 


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