By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 08, 2023
नयी दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेसके नेता डेरेक ओ’ब्रायन को उनके ‘अशोभनीय आचरण’ के कारण मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव किया गया लेकिन बाद में सभापति जगदीप धनखड़ ने इस मुद्दे को निस्तारित करते हुए कहा कि सदस्य आगे से अपने आचरण को सदन की गरिमा के अनुरूप बनाएंगे। जैसे ही सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ हुई सभापति ने आज के दिन जन्म लेने वाले सदस्यों को बधाई दी और फिर आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद सभापति ने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत मणिपुर पर चर्चा के लिए 51 नोटिस मिले हैं। उन्होंने बताया कि वह इस बारे में पहले ही व्यवस्था दे चुके हैं। इसके कुछ देर बाद व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए डेरेक ने नियम 267 के तहत मणिपुर हिंसा पर चर्चा शुरू किए जाने की मांग की। सभापति धनखड़ ने डेरेक के हावभाव, उनके आचरण एवं ऊंची आवाज में अपनी बात रखने पर आपत्ति जताते हुए उन्हें अपनी सीट पर बैठने को कहा। धनखड़ ने इसके बाद कहा कि वह डेरेक का नाम लेते है। सभापति द्वारा जब किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो इसके साथ ही उसके निलंबन की कार्रवाई शुरू हो जाती है। इसके बाद सदन के नेता पीयूष गोयल ने एक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि डेरेक लगातार सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं और आसन की अवमानना कर रहे हैं। गोयल जब यह प्रस्ताव रख रहे थे, उस दौरान विपक्षी सदस्य हंगामा कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘प्रस्ताव किया जाता है कि डेरेक ओ’ब्रायन को अशोभनीय आचरण के लिए सदन की सेवाओं से सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जाए।’’ सभापति ने कहा, ‘‘डेरेक को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया जाता है। उन्हें सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जाता है।’’ इस बीच हंगामा होता देख धनखड़ ने उच्च सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने डेरेक के निलंबन का मुद्दा उठाया और आसन से आग्रह किया वे उदारता दिखाते हुए उनका निलंबन वापस लें। डेरेक उस वक्त सदन में मौजूद थे और अपनी सीट पर बैठे थे। तिवारी को जवाब देते हुए धनखड़ ने सदन से सवाल किया कि क्या आपको लगता है कि निलंबित किए जाने के बाद सदन से जाने के बाद कोई सदस्य कार्यवाही में हिस्सा ले सकता है। सभापति ने कहा कि इस मामले में उन्होंने सदन की राय नहीं ली थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सोचसमझकर और दूरदर्शिता से ऐसा किया और इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी...अगर आदेश पूरी तरह पारित होता तो डेरेक को सदन छोड़ना पड़ता। वह सदन में फिर नहीं आ सकते थे। वह इसलिए सदन में मौजूद हैं कि निलंबन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।’’