By अंकित सिंह | Apr 20, 2026
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार को आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को लेकर चलाया जा रहा अभियान वास्तविक इरादे से नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह मुद्दा सत्ता में बने रहने और अपनी स्थिति को सुरक्षित रखने का था, न कि महिला आरक्षण का। एएनआई से बात करते हुए रमेश ने कहा कि संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार विपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में हमने लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे की जीत देखी। बेलगाम और परिसीमन की राजनीति हार गई। मुद्दा परिसीमन का था, न कि महिला आरक्षण का।
रमेश ने सरकार के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पहले लागू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अचानक 16 अप्रैल की रात को विधेयक अधिसूचित कर दिया गया। आपका (भाजपा का) इरादा क्या है? इतनी जल्दी क्या थी?” उन्होंने पूछा, “एक और बात यह है कि लोकसभा की संख्या 543 है, फिर भी संवैधानिक विधेयक में राज्यों के हिस्से में आनुपातिक वृद्धि का उल्लेख क्यों नहीं है, जबकि गृह मंत्री ने सदन में इसका जिक्र किया था। इरादा क्या है? हम उस व्यक्ति पर कैसे भरोसा कर सकते हैं जो कुछ कहता है, लेकिन विधेयक में उसका जिक्र नहीं है?
उन्होंने आगे दावा किया कि असम और जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए परिसीमन खतरनाक और भरोसेमंद नहीं थे। उन्होंने सरकार पर जाति जनगणना से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सरकार जाति जनगणना कैसे कराएगी... असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह खतरनाक और भरोसेमंद नहीं है। आप जाति जनगणना से क्यों भाग रहे हैं?