By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 16, 2026
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विपक्षी दलों से महिलाओं को आरक्षण देने के लिए परिसीमन से जुड़े विधेयक का समर्थन करने की अपील को ‘‘नाटक’’ करार दिया और आरोप लगाया कि उनका एकमात्र एजेंडा ‘‘मोदी को बचाना है, महिलाओं का आरक्षण नहीं।’’ कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील की मंशा पर सवाल उठाया और कहा कि उन्हें लाल किले से ‘‘उपदेश देने’’ के बजाय 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या के आधार पर ही महिलाओं को आरक्षण लागू करना चाहिए। प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन में विपक्षी दलों से की गई अपील के बारे में सवाल पर रमेश ने कहा कि घटनाक्रम को समझना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन विधेयक पारित किए गए थे, जिनमें पंचायतों, जिला परिषदों, प्रखंड पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
इसका मतलब है कि महिलाओं के लिए 182 सीटें आरक्षित की जाएं। उन्होंने कहा कि अचानक, 16 अप्रैल 2026 को रात 11 बजे, जब संसद में परिसीमन के मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा था, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को अधिसूचित कर दिया गया। रमेश ने कहा कि सरकार की दिलचस्पी केवल महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने में है।
उन्होंने कहा कि सरकार ‘‘दागी दो-तिहाई बहुमत’’ हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में भी पेश नहीं किया जा सका। रमेश ने कहा, ‘‘उनके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है और उन्हें यह बहुमत कभी नहीं मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बार-बार लाल किले से ‘‘उपदेश देने’’ और यह ‘‘नाटक’’ करने के बजाय 2029 के लोकसभा चुनाव से ही मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का एकमात्र एजेंडा ‘महिलाओं को आरक्षण नहीं, बल्कि मोदी को बचाना’ है।’’ रमेश की यह टिप्पणी मोदी द्वारा विपक्षी दलों से परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा पिछले 40 वर्षों से राजनीतिक अखाड़े में फंसा हुआ है।
विस्तारित बजट सत्र के दौरान लाया गया संविधान संशोधन विधेयक 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने से संबंधित था। प्रस्तावित विधेयक को निचले सदन में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। हालांकि, विपक्षी दलों के विरोध के बीच विधेयक पारित नहीं हो सका।