By अभिनय आकाश | Apr 13, 2026
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का अचानक यूएई पहुंचना एक बड़ी राजनीतिक घटना थी। इस दौरे की टाइमिंग को लेकर चर्चा गर्म है कि आखिर एस जय शंकर का दौरा तनाव के वक्त क्यों हुआ और इसके पीछे का कूटनीतिक संदेश क्या है? एस जयशंकर का संयुक्त अरब अमीरात पहुंचना सिर्फ एक दौरा नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक दांव माना जा रहा है। एस जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस मुलाकात को एक खास सम्मान बताया है। उन्होंने पीएम मोदी की तरफ से यूएई नेतृत्व को शुभकामनाएं दी हैं और कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के समय यूएई ने भारतीय लोगों को सुरक्षा और अच्छा ध्यान रखा है। उन्होंने यह भी कहा है कि भारत और यूएई के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं और इसे आगे बढ़ाने में यूएई की अहम भूमिका है।
स्टेट ऑफ हॉर्मोस के बंद होने पर तेल और गैस की सप्लाई जारी रह सके। मुमकिन है कि भारत बब अल मंदेव स्ट्रीट के रास्ते गल्फ ऑफ अडन रूट से तेल और गैस की सप्लाई जारी रखने की कोशिश कर रहा है। उधर जयशंकर के दौरे के बीच ही यूएई में पाकिस्तान को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई है। अब इसे इत्तेफाकी कहा जा रहा है कि जयशंकर का दौरा हुआ और उसी वक्त ईरान को लेकर पाकिस्तान की नरमी का जमकर विरोध शुरू हो गया। यूएई के इन्फ्लुएंसरर अमजद ताहा के बयान भी चर्चे में आ गए हैं। उन्होंने कहा है कि भारत एक मजबूत और भरोसेमंद देश है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं कि वह ईरान का समर्थन करता है और खाड़ी देशों के खिलाफ उसके रुख भी आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान की नीतियां भरोसेमंद बिल्कुल भी नहीं है और यह वो केवल अपने फायदे के लिए ही काम करता है। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यूएई की नीति की तारीफ की है और कहा है कि यूएई अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करता। इन सभी बातों का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सब उस वक्त सामने आया है जब जयशंकर का यूएई दौरा चल रहा था। इससे यह साफ होता है कि इस समय दुनिया में कूटनीतिक, सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं।