Operation Sheruwali के तहत Rajouri के जंगलों में आतंकियों की घेराबंदी! Shopian में भी Encounter, Kupwara में Terror Hideout ध्वस्त

By नीरज कुमार दुबे | Jul 07, 2026

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग अब केवल मुठभेड़ों और त्वरित अभियानों तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक लंबी, थकाऊ और धैर्य की परीक्षा लेने वाली लड़ाई में बदल चुकी है, जहां सुरक्षा बलों को हर कदम सोच समझकर रखना पड़ रहा है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां से लेकर कुपवाड़ा और राजौरी पुंछ के घने जंगलों तक फैला मौजूदा सुरक्षा अभियान इस बदलती रणनीति और नए खतरे की साफ तस्वीर पेश कर रहा है।

घेराबंदी में फंसे आतंकियों की पहचान लतीफ और जाकिर के रूप में हुई है। दोनों दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर वर्ष 2024 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है, जबकि लतीफ पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था। जब सुरक्षा बल उनके करीब पहुंचे तो आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से मुठभेड़ हुई।

सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। रात के समय आतंकियों के भागने की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन गर्मियों के मौसम में घने पेड़, झाड़ियां और पत्तियां आतंकियों को प्राकृतिक सुरक्षा कवच दे रही हैं। यही वजह है कि छोटे आतंकी समूह भी सुरक्षा बलों को कई दिनों तक उलझाए रखने में सफल हो रहे हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी बड़े आतंकी नेटवर्क और खुली घुसपैठ इस संघर्ष की पहचान हुआ करती थी, लेकिन अब छोटे, बिखरे और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित आतंकी समूह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। शोपियां अभियान इसी नई रणनीति का हिस्सा दिखता है, जहां स्थानीय आतंकी न केवल सुरक्षा घेरे से बचने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि भर्ती और मददगार नेटवर्क को भी जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।

इसी बीच, उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सेना ने एक बड़े आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ कर आतंकियों की साजिश को करारा झटका दिया है। केरन सेक्टर में विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए अभियान में सुरक्षा बलों ने एके श्रृंखला की पांच राइफल, नौ मैगजीन, एक हथगोला और भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया। यह बरामदगी इस बात का संकेत भी है कि सीमा पार से आतंकी ढांचे को सक्रिय रखने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

लेकिन जम्मू क्षेत्र के राजौरी पुंछ बेल्ट में चल रहा "ऑपरेशन शेरुवाली" इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा और सबसे गंभीर चेहरा बनकर उभरा है। यह अभियान अब चालीस से ज्यादा दिन पार कर चुका है। लेकिन राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर के गम्भीर मुगलान और दोरीमल के घने जंगलों में सुरक्षा बल अब भी आतंकियों की तलाश में डटे हुए हैं। शुरुआती खुफिया सूचना के बाद शुरू हुआ यह अभियान अब एक लंबे घेरेबंदी युद्ध में बदल चुका है। सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और विशेष अभियान समूह लगातार जंगलों में दबाव बनाए हुए हैं। भारी गोलीबारी, अतिरिक्त तैनाती और चौतरफा घेराबंदी के बावजूद आतंकी अब तक पकड़ से बाहर हैं।

हम आपको बता दें कि राजौरी पुंछ क्षेत्र का भूगोल आतंकियों को सबसे बड़ा सहारा देता है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल, संकरे रास्ते और कई संभावित भागने के मार्ग सुरक्षा बलों की तकनीकी बढ़त को सीमित कर देते हैं। यही वजह है कि अब सुरक्षा रणनीति में तेजी से हमले करने की बजाय लंबी घेराबंदी, आवाजाही रोकने, निगरानी मजबूत करने और आतंकी रसद को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है। यह रणनीति साफ संकेत देती है कि सुरक्षा एजेंसियां अब केवल आतंकियों को मार गिराने की जल्दबाजी में नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं। खासतौर पर राजौरी पुंछ बेल्ट में 2021 के बाद जिस तरह छोटे और टिकाऊ आतंकी समूह सक्रिय हुए हैं, उसने सुरक्षा तंत्र को नई सोच अपनाने पर मजबूर किया है।

इसी दौरान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर भी बड़े पैमाने पर अभ्यास चल रहे हैं। आतंकी हमले, बंधक संकट, काफिला सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया जैसे हालातों पर लगातार अभ्यास किए जा रहे हैं। यह दिखाता है कि सुरक्षा बल एक साथ कई मोर्चों पर दबाव संभालने की क्षमता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर की मौजूदा तस्वीर यह साफ कर रही है कि आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसने अपना चेहरा बदल लिया है। अब यह कम दिखाई देने वाला, ज्यादा बिखरा हुआ और ज्यादा धैर्य मांगने वाला संघर्ष बन चुका है।

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