By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 13, 2026
45 साल की उम्र तक कई लोग अपने सपने पूरे करने की जद्दोजहद छोड़ देते हैं लेकिन रेणु हंस ने ऐसा नहीं किया और यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प के दम पर उम्र और विपरीत परिस्थितियों पर जीत हासिल की जा सकती है। सुनने और बोलने में असमर्थ कश्मीरी पंडित महिला रेणु ने हाल ही में 82 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं कक्षा की परीक्षा पास की और 22 वर्षों से संजोए अपने सपने को सच कर दिखाया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे लगन, पारिवारिक सहयोग और मां-बेटे के अनोखे रिश्ते की कहानी छिपी है।
कौल का परिवार 1990 के दशक की शुरुआत में घाटी से पलायन करने के बाद से जम्मू के बाहरी इलाके लोअर रूप नगर के एक सरकारी फ्लैट में रहता है। कौल ने अपने घर पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते कहा, “मुझे लगा कि मेरी मां को घर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। अगर वह पढ़ाई करेंगी, तो जीवन में आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने हमेशा पढ़ने और एक अच्छी नौकरी पाने का सपना देखा था। वह बहुत लंबे समय से इस सपने को दिल में संजोए हुए थीं, और 10वीं कक्षा पास करना उस सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है।