By अंकित सिंह | May 08, 2024
भारत में भ्रष्टाचार हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। हाल में ही झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उनके घरेलू सहायक के पास से प्रवर्तन निदेशालय ने 32 करोड रुपए से अधिक की नगदी बरामद किए थे। दोनों से पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें हिरासत में ले लिया। चुनावी मंचों पर भाजपा की ओर से इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष पर वार करते हुए भाजपा यह कह रही है कि हमारे विरोध में खड़ी तमाम राजनीतिक दल भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं। इससे पहले भी झारखंड से ही एक कांग्रेस नेता के यहां से 300 करोड़ से ज्यादा की कैश बरामद हुए थे। उस पर भी खूब राजनीति हुई थी। इसके अलावा कई नेताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। सरकार की ओर से इसे भ्रष्टाचार पर प्रहार बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष का दावा है कि बदले की भावना से सरकार की ओर से यह कार्रवाई की जा रही है। इसी को लेकर देश के प्रसिद्ध अधिवक्ता और भारत के पीआईएल मैन के रूप में विख्यात अश्विनी उपाध्याय ने अपनी बात रखी है, सुनते हैं।
वरिष्ठ वकील ने आगे कहा कि इस देश में लगातार बड़े-बड़े घोटाले होते रहे हैं। उनकी जांच भी की गई है लेकिन भ्रष्टाचार के मामले खत्म नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतने सारे घोटाले हुए लेकिन किसी घोटालेबाज की 100% संपत्ति जब्त नहीं की गई। किसी घोटालेबाज की नागरिकता खत्म नहीं हुई। किसी घोटालेबाज को आजीवन करवास या फांसी नहीं हुई। थानेदार, तहसीलदार पेशकार सबको पता है कि खुले में भ्रष्टाचार होता है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग में भी भ्रष्टाचार देखने को मिलता है। इसके बावजूद किसी घोटाले में बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। किसी भी घोटालेबाज को सजा नहीं हुई है। इसका बड़ा कारण यह है कि हमारा कानून घटिया है। हमारी न्यायिक व्यवस्था सड़ी हुई है। पुलिस रिफॉर्म नहीं हुआ, ज्यूडिशल रिफॉर्म नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब-जब घोटाले होंगे तब तब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हमें देखने को मिलेगा। लेकिन कार्रवाई नहीं होगी।