Janmashtami Special: जानें Shri Krishna के श्रृंगार में शामिल 5 प्रमुख चीजों का Spiritual Significance

By दिव्यांशी भदौरिया | Sep 02, 2026

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद नजदीक आ चुका है। इस दिन साधक भगवान कृष्ण को श्रृंगार करते, प्रिय भोग बनाते हैं, मंदिर को सुंदर सजाते हैं, व्रत रखते हैं और भगवान की झांकी को सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का स्वरुप बेहद ही मनमोहक है। बांसुरी धारण किए, मोर मुकुट सजाए और अपनी लीलाओं से भक्तों का मन हरते भगवान कृष्ण को भक्त कई नामों से पुकारते हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी दिन से भक्त उनका जन्मोत्सव का बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस साल 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास दिन पर भक्त घर के मंदिर में लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण की प्रतिमा का श्रृंगार करते हैं। आइए आपको बताते हैं किन चीजों का खास महत्व है और किन चीजों के बिना उनके श्रृंगार को अधूरा माना जाता है।

मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार में मोर मुकुट का खास महत्व माना जाता है। वैसे इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इस बात का भी प्रतीक है कि श्रीकृष्ण सभी जीवों से एक समान भाव से प्यार करते हैं।  धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरपंख को सुंदरता, सकारात्मकता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। मोर पंख को राधा-रानी और श्री कृष्ण के सच्चे प्रेम के प्रतीक के रुप में भी देख सकते हैं।

बांसुरी

गौरतलब है कि बांसुरी सिर्फ श्रीकृष्ण के श्रृंगार का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके जीवन से बहुत खास तरीके से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं में उनकी बांसुरी को मुरली, वेणु या वंशिका कहा गया है और बांसुरी बजाने की वजह से उन्हें मुरलीधर कहा जाता है। उनकी बांसुरी की मधुर धुन से संबंधित अनेक कथाएं और लोक परंपराओं में मिलती हैं। भक्तों के लिए बांसुरी प्रेम, मधुरता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

वैजयंती माला

भगवान श्रीकृष्ण के गले में हमेशा वैजयंती माला सुशोभित रहती है और उनके श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके बिना श्रीकृष्ण का श्रृंगार और उनकी पूजा अधूरा मानी जाती है। वैसे यह माला भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को भी अति प्रिय है। 

पीतांबर

यदि आप भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कर रहे हैं, तो पीतांबर यानी पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। वैसे तो कन्हा जी को किसी भी रंग के कपड़े अर्पित कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें पीतांबर, यानी पीले रंग वस्त्र धारण किए देखा जा सकता है। इसलिए उन्हें 'पीतांबरधारी' भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में पीले रंग का ज्ञान, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।

आभूषण

श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरुप का श्रृंगार करते समय भक्तजन उन्हें मोर मुकुट और बांसुरी के साथ ही कुंडल, हार, बाजूबंद, कंगन, पायल और कमरबंध जैसे आभूषण भी पहनाते हैं। आप भी इन आभूषण को जरुर पहनाएं। 

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