Japan का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 2.81 लाख करोड़ येन पर पहुंचा, महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई लागत

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 21, 2026

ईरान में युद्ध के कारण तेल आयात की कीमतें बढ़ने से जापान का चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में व्यापार घाटा 2.81 लाख करोड़ येन (17.8 अरब अमेरिकी डॉलर) पर पहुंच गया। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। वित्त मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि में जापान का निर्यात सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 63.5 लाख करोड़ येन हो गया।

प्राकृतिक संसाधनों की कमी वाले जापान को अपने तेल की लगभग पूरी जरूरत आयात से पूरी करनी पड़ती है। तेल की खेप मंगाने के लिए वह पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही पर निर्भर रहा है। अब यह मार्ग लगभग बंद हो गया है और जापान को दूसरे रास्तों से तेल मंगाने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फरवरी में 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर हाल में करीब 100 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। पिछले कुछ महीनों में इसका भाव 110 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में जल्द राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

सितंबर में जापान का व्यापार घाटा 53,660 करोड़ येन रहा। यह लगातार पांचवां महीना था, जब देश को व्यापार घाटा हुआ। हालांकि, अगस्त के 1.1 लाख करोड़ येन के घाटे के मुकाबले इसमें कमी आई।

सितंबर में जापान का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 18.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निर्यात में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। येन का कमजोर होना भी जापान के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात की लागत बढ़ जाती है। येन हाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 150 के स्तर पर बना हुआ है।

बैंक ऑफ जापान ने पिछले महीने अपनी प्रमुख ब्याज दर को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया था। यह 31 साल का उच्च स्तर है। बैंक की मौद्रिक नीति समिति अगले सप्ताह फिर बैठक करेगी।

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