काशी से क्योटो तक की कहानी: PM मोदी का जापानी दोस्त, जिसने वाराणसी से अहमदाबाद दौरे तक में छोड़ी अलग छाप

By अभिनय आकाश | Jul 08, 2022

14 जुलाई 2021 की वो तारीख जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी कन्वेंशन सेंटक का उद्घाटन करने आए तब उन्होंने कहा कि इस आयोजन में एक और व्यक्ति हैं, जिनका नाम मैं नहीं भूल सकता। जापान के ही मेरे मित्र- शिजों आबे। शिंजो आबे उस वक्त जापान के प्रधानमंत्री थे। बाद में सेहत का हवाला देते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर हुए जानलेवा हमले से पूरी दुनिया में दहशत है। सवाल कई उठ रहे हैं। आखिर हमलावर ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री पर हमला क्यों किया? क्वाड जैसे अहम गुट बनाने वाले शिंजो आबे दुश्मनों के निशाने पर आ गए। इस खबर से दुनियाभर के देश आहत हैं। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने दोस्त शिंजो आबे पर हमले के बाद दुख व्यक्त किया है। 

जापान के पूर्व पीएम पर हमले को लेकर पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि मेरे प्रिय मित्र शिंजो अबे पर हुए हमले से बहुत व्यथित हूं। हमारे विचार और प्रार्थनाएं उनके, उनके परिवार और जापान के लोगों के साथ हैं। बता दें कि पीएम मोदी और शिंजो आबे की दोस्ती बहुत गहरी रही है। ऐसे तो अंतरराष्ट्रीय नेताओं में पीएम मोदी के कई दोस्त हैं, लेकिन शिंजो आबे के साथ उनकी दोस्ती बेहद ही खास रही है। 

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 क्वाड की स्थापना में अहम रोल

29 दिसंबर 2004 को अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने घोषणा की कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएंगे। जिसका उद्देश्य होगा सुनामी में पानी में फंसे लोगों को बचाने, राहत पहुंचाने, बेघर लोगों के पुर्नवास, बिजली कनेक्टिवीटी और अन्य सेवाओं को बहाल करने के लिए काम करना होगा। सुनामी राहत का ये मिशन खत्म हुआ तो इस गठबंधन का एक नया ढांचा क्वाड के रूप में सामने आया। जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को साथ लेकर जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को समुद्र में अच्छे और मजबूत दोस्त बनाने चाहिए। 2006 में जब मनमोहन सिंह टोक्यो पहुंचे तो मामले को लेकर क्वाड की बैठक भी हुई और चीजों का विस्तार होना शुरू हुआ। क्वाड की स्थापना 2007 में हुई।

भारत और जापान के बीच एक बड़ी समानता 

भारत और जापान एशिया के दो अलग-अलग देश हैं और दोनों देशों के बीच लगभग 6 हजार किलोमीटर की दूरी है। हालांकि भारत और जापान के बीच एक बहुत बड़ी समानता ये है कि दोनों देशों की सीमाएं चीन से लगती हैं। चीन भारत की तरह जापान को भी एक प्रतिद्ववंदी देश के तौर पर देखता है। भारत क्षेत्रफल के मामले में जापान से लगभग 10 गुना बड़ा है। जापान का क्षेत्रफल 307700 वर्ग किलोमीटर जबकि भारत का क्षेत्रफल 3208700 वर्ग किलोमीटर। जापान क्षेत्रफल के मामले में लगभग भारत के राज्य राजस्थान के बराबर है। 

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गुजरात सीएम के वक्त से दोस्ती 

शिंजो आबे और नरेंद्र मोदी की दोस्ती तब से रही है जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि गुजरात के सीएम थे। साल 2007 में शिंजो आबे की पहली बार नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई और इसके बाद से सिलसिला लगातार चलता रहा। 26 जनवरी 2014 को गणतंत्र दिवस को आए थे लेकिन प्रोटोकॉल के तहत वो पीएम मोदी से मुलाकात नहीं कर सके इसके बाद पीएम मोदी शिंजो आबे से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। 

वाराणसी से अहमदाबाद

दिसंबर 2015 में जब आबे भारत दौरे पर आए थे, तब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी गए थे। उस समय वाराणसी इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशनल सेंटर की घोषणा की। इस प्रोजेक्ट को जापान की मदद से बनाया गया है। इसमें जापान ने 186 करोड़ रुपये की मदद की थी। सितंबर 2017 में जब आबे भारत आए तो वो पीएम मोदी के साथ अहमदाबाद गए। उन्होंने साबरमती आश्रम भी घूमा। इसी दौरे में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन जापान की मदद से ही बन रही है। इस प्रोजेक्ट पर 1.08 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से 88 हजार करोड़ रुपये जापान लगा रहा है। 

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पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित

भारत ने पिछले साल ही जापानी पीएम शिंजो आबे को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने का फैसला किया था। उन्हें यह सम्मान जनसेवा के क्षेत्र में दिया गया था। जापानी रक्षा मंत्री होसोई नोरोता का साल 2001 में मिले सम्मान के बाद आबे दूसरे जापानी राजनेता थे जिन्हें यह सम्मान दिया गया। 

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