By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 14, 2026
दिवाला प्रक्रिया के तहत सुरक्षा समूह द्वारा अधिग्रहीत रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक अगले दो साल में करीब 3,000 करोड़ रुपये का निवेश कर सभी अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करेगी। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह सितंबर, 2028 तक सभी प्रभावित घर खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा दे देगी। कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे पर कुल 450 एकड़ से अधिक क्षेत्र में तीन नई टाउनशिप विकसित करने की योजना की भी घोषणा की।
जब समूह ने जेआईएल का परिचालन संभाला था, उस समय कुल 159 टावर का निर्माण कार्य अटका हुआ था। उन्होंने कहा कि अब तक 5,000 इकाइयों का कब्जा ग्राहकों को दिया जा चुका है, जबकि करीब 3,000 इकाइयों का कब्जा दिया जाना बाकी है। सभी परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर वालिया ने कहा कि कंपनी सितंबर, 2028 तक सभी निर्माण कार्य पूरे कर ग्राहकों को उनके घरों का कब्जा दे देगी।
उन्होंने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि हम सभी इकाइयों को तय समयसीमा में सौंप देंगे।” अबतक किए गए निवेश और आगे होने वाले खर्च के बारे में पूछे जाने पर वालिया ने कहा, “कंपनी ने अब तक करीब 1,500-2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है और सभी अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये और निवेश करेगी।” उन्होंने कहा कि यह निवेश मुख्य रूप से अपार्टमेंट के बचे हुए निर्माण कार्य को पूरा करने में किया जाएगा। परियोजनाओं की लागत के लिए धन की व्यवस्था के बारे में वालिया ने कहा कि कंपनी को मौजूदा ग्राहकों से 1,800-2,000 करोड़ रुपये की राशि मिलनी है। इसके अलावा, यमुना एक्सप्रेसवे से टोल संग्रह के जरिये उसे सालाना करीब 500 करोड़ रुपये की आय होती है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के पास करीब 2,000 खाली पड़ी आवासीय इकाइयां भी हैं, जिनकी संभावित बिक्री कीमत 2,500 करोड़ रुपये है। मुंबई के सुरक्षा समूह ने अपनी अंतिम समाधान योजना में विभिन्न अटकी आवासीय परियोजनाओं में करीब 20,000 घरों को पूरा करने और उसके बाद प्रभावित घर खरीदारों को उनका कब्जा देने का वादा किया था। विस्तार योजना के बारे में जेपी इन्फ्राटेक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिजीत गोहिल ने कहा कि कंपनी तीन टाउनशिप शुरू करने की योजना बना रही है।
इनमें दो आवासीय और एक औद्योगिक टाउनशिप होगी। सबसे बड़ी टाउनशिप 256 एकड़ में होगी, जबकि अन्य दो क्रमशः 124 एकड़ और 85 एकड़ में विकसित की जाएंगी।