By अभिनय आकाश | Sep 14, 2026
सूरज का तापमान जिसे छूना तो दूर उसके पास जाने की सोचना भी नामुमकिन लगता है। हमारी धरती को जीवन देने वाले सूरज के कोर का तापमान लगभग 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस होता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत के वैज्ञानिकों ने धरती के एक प्रयोगशाला के अंदर सूरज के केंद्र से भी 20 गुना ज्यादा तापमान पैदा कर दिखाया। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना है। 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा का तापमान। और अब भारत के इसी आर्टिफिशियल सन यानी कि न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर से जुड़ी हुई ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय में हलचल मचा दी। गुजरात के गांधीनगर में स्थित इंडियन इंस्टट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च यानी आईपीआर ने भारत के सबसे शक्तिशाली रिएक्टर एसएसटी वन मेक विशालकाय और बेहद एडवांस 82.6 गीगाHz जाइट्रॉन को सफलतापूर्वक इंस्टॉल और इंटीग्रेट कर दिया है।
आगे की संभावनाएं और चुनौतियां
यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत धीरे-धीरे लेकिन लगातार फ्यूजन प्रौद्योगिकी में महारत हासिल कर रहा है। SST-1 जैसे प्रयोगों से मिले अनुभव भविष्य में बड़े रिएक्टर बनाने में काम आएंगे। वैज्ञानिकों को प्लाज्मा को और लंबे समय तक स्थिर रखने तथा ऊर्जा उत्पादन के करीब पहुंचने के लिए और कई तकनीकी बाधाएं पार करनी होंगी। फिर भी नया जाइरोट्रॉन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।