By योगेश कुमार गोयल | Apr 17, 2025
यीशु (ईसा मसीह) के बलिदान, उनकी शिक्षाओं को याद करने का दिन है ‘गुड फ्राइडे’। दरअसल ईसा मसीह ने मानवता की भलाई के लिए बलिदान दिया। ईसाई मान्यता के अनुसार दुनिया को प्रेम, दया, करुणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार और पवित्र आचरण का संदेश देने वाले यीशु को इसी दिन उस जमाने के धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा क्रॉस पर चढ़ाया गया था। जिस दिन ईसा मसीह ने प्राण त्यागे थे, उस दिन शुक्रवार था और इसी याद में ‘गुड फ्राइडे’ मनाया जाता है। ईस्टर के रविवार से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है और इस वर्ष गुड फ्राइडे 18 अप्रैल को मनाया जा रहा है। ईसाई समुदाय द्वारा इस त्यौहार को शोक के रूप में मनाया जाता है। गुड फ्राइडे को यीशु द्वारा मानवता की भलाई के लिए दिए बलिदान के रूप में देखा जाता है। गुड फ्राइडे के दिन गिरजाघरों में घंटा नहीं बजाया जाता बल्कि लकड़ी के खटखटे बजाए जाते हैं और लोग चर्च में क्रॉस को चूमकर यीशु का स्मरण करते हैं। कुछ स्थानों पर लोग काले कपड़े पहनकर प्रभु यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं और यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। ईसा मसीह के सूली पर चढ़ाए जाने की याद में इस दिन उनके अनुयायी समस्त लौकिक सुविधाओं का त्याग कर देते हैं। इस दिन चर्च और घरों से सजावटी वस्तुएं हटा दी जाती हैं या उन्हें कपड़े से ढ़क दिया जाता है।
ईसा मसीह परिवर्तन के पक्षधर थे और उन्होंने मानव प्रेम की सीमा नहीं बांधी बल्कि अपने बलिदान से उसे आत्मकेन्द्रित एवं स्वार्थ से परे बताया। पृथ्वी पर बढ़ रहे पापों के लिए बलिदान देकर ईसा ने निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। ईसाई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रॉस पर लटकाए जाने के करीब तीन दिन बाद रविवार को ईसा मसीह पुनः जीवित हो गए थे, इसीलिए गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को ‘ईस्टर संडे’ के नाम से जाना जाता है। पुनः जीवित हो उठने के बाद ईसा ने अपने शिष्यों के साथ 40 दिनों तक रहकर हजारों लोगों को दर्शन दिए। ईसा मसीह के जी उठने की याद में ही दुनियाभर में ईसाई धर्म के अनुयायी ‘ईस्टर संडे’ मनाते हैं। ईस्टर की आराधना उषाकाल में ईसाई महिलाओं द्वारा की जाती है, क्योंकि माना जाता है कि यीशु का पुनरुत्थान इसी वक्त हुआ था और उन्हें सबसे पहले मरियम मदीलिनी नामक महिला ने देखा था तथा अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था।
- योगेश कुमार गोयल
(लेखक 35 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं)