By Ankit Jaiswal | Apr 09, 2026
दुनिया भर में बढ़ती ईंधन कीमतों ने विमानन क्षेत्र के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है और इसका सीधा असर एयरलाइंस के खर्च और मुनाफे पर पड़ रहा है।
इसी बीच, अमेरिकी एयरलाइन कंपनी डेल्टा का एक पुराना फैसला अब उसके लिए फायदेमंद साबित होता नजर आ रहा है हैं। बता दें कि साल 2012 में कंपनी ने पेंसिल्वेनिया स्थित ट्रेनर रिफाइनरी को करीब 150 मिलियन डॉलर में खरीदा था, जिसका उद्देश्य ईंधन की लागत पर नियंत्रण रखना था।
गौरतलब है कि उस समय यह फैसला काफी जोखिम भरा माना गया था, लेकिन अब जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के आसपास पहुंच गई हैं, तब डेल्टा को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अपनी खुद की रिफाइनरी होने से डेल्टा को तीसरे पक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह बाजार की अस्थिरता से काफी हद तक बच जाती है हैं। कंपनी की यह व्यवस्था उसे बाहरी सप्लायर को भुगतान करने से भी बचाती है और लागत को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एड बैस्टियन ने भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह रिफाइनरी कंपनी की आय को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल एक तिमाही में ही इस रिफाइनरी से कंपनी को सैकड़ों मिलियन डॉलर का फायदा होने की उम्मीद जताई गई है।
बता दें कि वैश्विक स्तर पर अन्य एयरलाइंस जहां ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से जूझ रही हैं, वहीं डेल्टा की यह रणनीति उसे प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला रही है हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य एयरलाइंस के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।