By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 17, 2026
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ़ विरोध कर रहे छात्रों ने रविवार को यहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर कार्रवाई करने के मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन ‘ठोस कदम उठाने में विफल’ रहा है। आंदोलन के 23वें दिन में प्रवेश करने के साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला।
फिल्म और टीवी अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने सबिता कुमारी से भी बातचीत की जो उन छह प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं जो दो सप्ताह से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं। कुनिका सदानंद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें वाजिब हैं।
एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी कि कांग्रेस को सत्तारूढ़ गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार मुख्यमंत्री ‘उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।’ रविवार को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें स्वीकार करनी चाहिए।’’ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र संगठन ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ की मुख्य मांगों में 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करना, सभी परीक्षाओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराना, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। छात्र वित्त विभाग के ‘अनुभाग अधिकारी’ और अनियमितता का खुलासा करने वाले संतोष कुमार मस्ताना का निलंबन रद्द करने और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं। मरांडी ने कहा, ‘‘छात्र गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और मुझे लगता है कि सरकार को इसका आदेश देना चाहिए।
सरकार इससे क्यों डर रही है? अगर सरकार अड़ी रहती है, तो इसका मतलब यह है कि वह युवाओं और छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है।’’ मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के छात्रों के आह्वान पर भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी ‘उनके आंदोलन को नैतिक समर्थन देती है क्योंकि वे तीन सप्ताह से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं’। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रदेश कांग्रेस 18 अगस्त को एक बैठक करेगी।
इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में सुधार के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। झारखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’ जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा, ‘‘हम 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि झामुमो और कांग्रेस दोनों हमारे साथ राजनीति कर रहे हैं।
हमारी यह भी मांग है कि यदि मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं सुन रहे हैं, तो राहुल गांधी झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लें।’’ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उनकी मांगों में उन परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है, जिनमें कथित तौर पर अनियमितताएं पाई गई हैं, और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के सभी जिलों के छात्रों से अपील की कि वे 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव के लिए रांची में एकत्र हों।
उन्होंने राहुल गांधी को भी निशाना बनाया और कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन करने की बात तो कही थी, लेकिन इसके बाद “कोई ठोस कदम” नहीं उठाया गया। छात्रों के संगठन ने मांग की कि यदि झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार उनकी समस्याओं पर कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है, तो कांग्रेस उससे अपना समर्थन वापस ले ले। पासवान ने कहा, ‘‘हम हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि सरकार उन जेएसएससी-सीजीएल और जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने में विफल रही, जिनमें अनियमितताएं पाई गई थीं।” प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन केवल कुछ खास परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई कदमों की घोषणा करके नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है।