झारखंड के मंत्री Sudivya Kumar का निधन, Hemant Soren के रहे प्रमुख संकटमोचक

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 06, 2026

(नमिता तिवारी) रांची, छह सितंबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भरोसेमंद सहयोगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अहम सियासी संकटमोचकों में शामिल रहे सुदिव्य कुमार ने सबसे चुनौतीपूर्ण क्षणों में पार्टी को उबारने में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर चुनाव अभियान, सीट बंटवारे के लिए बातचीत और हालिया छात्र आंदोलन तक के दौर शामिल हैं। गिरिडीह से दो बार के विधायक और राज्य मंत्री रहे 56 वर्षीय कुमार के आकस्मिक निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने ऐसे नेता को खो दिया है, जिसका महत्व उनके पास रहे मंत्री पद से कहीं अधिक था।

वह मुख्यमंत्री के राजनीतिक रूप से भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए थे। जनवरी 2024 में कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उथल-पुथल भरे दौर में कुमार की भूमिका सबसे अधिक दिखाई दी। झामुमो नेतृत्व के सामने जब सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक खड़ी थी, तब कुमार उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने पार्टी की संगठनात्मक और राजनीतिक मशीनरी को सुचारू रूप से चलाए रखने में मदद की और सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे।

इसके तुरंत बाद उन्हें एक और राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें गांडेय विधानसभा उपचुनाव में झामुमो के चुनाव अभियान की कमान सौंपी गई। यह चुनाव कल्पना सोरेन का पहला चुनाव था।

कुमार ने पार्टी की मुख्य चुनाव अभियान समिति की अगुवाई की और उनके चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। जून 2024 में कल्पना सोरेन की जीत से झामुमो को महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त मिली और मुख्यमंत्री की पत्नी को सोरेन खेमे के एक नए चुनावी चेहरे के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद के साथ सीट बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में कुमार झामुमो के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल थे।

उनकी भूमिका चुनावों तक सीमित नहीं थी। वह झामुमो के राजनीतिक संगठन और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे और उन्हें चुनावी रणनीति, राजनीतिक बातचीत तथा अन्य संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी जाती थीं। कठिन परिस्थितियों से निपटने की उनकी क्षमता हालिया छात्र आंदोलन के दौरान भी देखने को मिली।

यह आंदोलन परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों ने किया था। सोरेन द्वारा गठित मंत्रिमंडलीय समिति की अध्यक्षता कुमार ने की और गतिरोध खत्म करने के प्रयास में उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कई दौर की बातचीत की। धनबाद में 26 जुलाई 1970 को जन्मे कुमार ने कम उम्र में ही राजनीति में प्रवेश किया था।

उन्होंने वर्ष 2009 और 2014 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2019 में उन्होंने गिरिडीह सीट से जीत हासिल की। वर्ष 2024 में उन्होंने इस सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी।

कुमार के परिवार में उनकी पत्नी श्वेता शर्मा, दो बेटियां और एक बेटा है।

प्रमुख खबरें

China Masters खिताब जीतकर Satwik Chirag ने Asian Games से पहले बढ़ाया अपना हौसला

Bihar Flood: Patna के Gandhi Ghat पर गंगा का जलस्तर HFL पार, 11 जिलों में 19 लाख लोग प्रभावित

Satwik-Chirag ने जीता China Masters का खिताब, फाइनल में चीनी जोड़ी को हराया

216 रेस बाद Sergio Perez की ऐतिहासिक Pole Position, जानें Formula 1 के 10 Late Bloomers की कहानी