Jammu University में Jinnah पर संग्राम, ABVP का सवाल- बंटवारे के गुनहगार सिलेबस में क्यों?

By एकता | Mar 22, 2026

जम्मू यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विवाद की मुख्य वजह पॉलिटिकल साइंस के पोस्टग्रेजुएट सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर आधारित एक चैप्टर को शामिल करना है।

देश के बंटवारे के जिम्मेदार लोगों को क्यों पढ़ाएं?

ABVP के प्रदेश सचिव सन्नक श्रीवत्स का कहना है कि सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे लोगों ने 'टू-नेशन थ्योरी' को बढ़ावा दिया था और देश के बंटवारे में मुख्य भूमिका निभाई थी।

परिषद का तर्क है कि अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों के तौर पर ऐसे लोगों को पढ़ाना राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ है और छात्रों के लिए स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि अगर अल्पसंख्यकों के बारे में पढ़ाना ही है, तो उन महान हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्होंने देश की एकता और समाज की भलाई के लिए सचमुच काम किया हो।

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यूनिवर्सिटी का बचाव

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख बलजीत सिंह मान ने सिलेबस का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक अकादमिक फैसला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिलेबस में केवल जिन्ना या इकबाल ही नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, बी.आर. अंबेडकर, सावरकर, गोलवलकर, नेहरू और सरदार पटेल जैसे सभी प्रमुख विचारकों को पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन विषयों को हटाने से उन छात्रों का नुकसान होगा जो नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि वहां इनसे जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

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UGC के नियमों का हवाला

विभाग ने जोर देकर कहा कि यह सिलेबस एक कमेटी द्वारा पास किया गया है और यह यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। बलजीत सिंह मान के अनुसार, राजस्थान, महाराष्ट्र और कोलकाता की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज में भी यह कंटेंट पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का मकसद किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि छात्रों के सामने अलग-अलग नजरिए पेश करना है ताकि वे खुद सही और गलत की पहचान कर सकें। उनके अनुसार, ऐतिहासिक स्पष्टता के लिए इन विचारकों के जीवन में आए बदलावों को समझना जरूरी है।

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