Jai Prakash Narayan Death Anniversary: जेपी नारायण ने ठुकरा दिया था PM और राष्ट्रपति पद, दिया था संपूर्ण क्रांति का नारा

By अनन्या मिश्रा | Oct 08, 2025

संपूर्ण क्रांति के नायक जयप्रकाश नारायण का 08 अक्तूबर को निधन हो गया था। एक ओर जहां नेता सत्ता पाने के लिए राजनीति करते हैं, लेकिन जयप्रकाश नारायण एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने कभी सत्ता को छुआ भी नहीं था। जेपी ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था, जिसने पूरे देश को झझकोर कर रख दिया था। हालांकि उनका जीवन काफी संघर्षमय रहा, लेकिन वह कभी किसी के सामने नहीं झुके थे। उन्होंने पढ़ाई के दौरान होटल में भी काम किया, लेकिन कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जेपी नारायण के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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शादी

साल 1920 में जेपी नारायण शादी के बंधन में बंध गए। इनका विवाह प्रभावती देवी के साथ हुआ। महात्मा गांधी के आमंत्रण पर प्रभावती देवी उनके आश्रम चले गए और इस दौरान जेपी नारायण पटना में कार्यरत थे।

सियासी सफर

साल 1929 में जेपी नारायण उच्च शिक्षा प्राप्त कर अमेरिका से भारत वापस लौट आए। जेपी नारायण ने गांधी जी को अपना राजनीतिक गुरु बनाया औऱ लगातार उनसे सीखते रहे। फिर साल 1932 में ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेपी को जेल में डाल दिया। जेल में उनकी मुलाकात राम मनोहर लोहिया से हुई और इस समय कांग्रेस में वामपंथी दल का निर्माण हुआ था, जिसे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी कहा गया। इसके अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र देव हुए और महासचिव जयप्रकाश नारायण बने।

बता दें कि जेपी नारायण एक ऐसे शख्स के रूप में उभरे, जिन्होंने पूरे देश में आंदोलन चलाया। उनके विचार दर्शन और व्यक्तित्व ने पूरे जनमानस को प्रभावित किया। वहीं जेपी नारायण ने लोकनायक शब्द को चरितार्थ किया और संपूर्ण क्रांति का नारा दिया। वहीं उन्होंने 05 जून 1974 को विशाल सभा में पहली बार जेपी नारायण ने 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का नारा दिया था।

संपूर्ण क्रांति के जनक

भारतीय इतिहास में यह क्रांति एक महत्वपूर्ण मुकाम रखती है। राजनीतिक विचारक जेपी नारायण ने छात्रों के बीच तत्कालीन व्यवस्था और सरकार के खिलाफ आंदोलन की मशाल जलाने का काम किया। जिस कारण यह चिंगारी पूरे देश में फैल गई। जेपी ने संपूर्ण क्रांति की विचारधारा से छात्र आंदोलन को जन आंदोलन में बदल दिया था।

मृत्यु

वहीं 08 अक्तूबर 1979 को जय प्रकाश नारायण का निधन हो गया था। फिर साल 1999 में जेपी नारायण को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वहीं साल 1965 में जेपी को समाजसेवी के लिए मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया था।

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