By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 15, 2026
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजित कुमार ने शुक्रवार को यहां कहा कि प्रत्येक आविष्कार के दो पहलू होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक और यही बात कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी लागू होती है। शंख संस्थान के तत्वावधान में चिन्मय मिशन अमृत महोत्सव के अवसर पर ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानव चेतना’ विषय पर आयोजित विशेष संवाद को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा कि जब मानव मन नकारात्मकता के साथ कार्य करता है, तो उसके परिणाम अंधकारमय होते हैं, जबकि सकारात्मक दृष्टिकोण से किए गए प्रयास उज्ज्वल परिणाम देते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम एआई का उपयोग प्रत्येक कार्य और प्रत्येक उद्देश्य के लिए करने लगें और अपने मन को कहीं और लगा दें, तो हम उन मानवीय क्षमताओं को खो सकते हैं, जिनकी मानवता को आवश्यकता है।’’ न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा, ‘‘आत्म-चेतना मनुष्य के भीतर पहले से ही विद्यमान है।
वह कृत्रिम है, मौलिक नहीं। इस पृथ्वी पर बहुत कुछ एआई के माध्यम से हासिल किया जा सकता है, लेकिन ‘मोक्ष’ अथवा अनुभूति को इसके माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य शंतनु महाराज ने कहा, ‘‘ एआई मनुष्य की चेतना का उत्पाद है।
कोई उत्पाद मूल वस्तु का विकल्प नहीं हो सकता और न ही उसका स्थान ले सकता है। एआई से उत्तर प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन प्रश्न पूछने की क्षमता मनुष्य के भीतर है। यही क्षमता मानव चेतना की विशिष्टता को स्थापित करती है।’’ कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल शिव कुमार पाल, अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी, शंख के संयोजक आलोक परमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।