Supreme Court के जस्टिस Sanjay Karol के फैसलों का योगदान रहा अहम: न्यायमूर्ति Surya Kant

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 21, 2026

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के निवर्तमान न्यायाधीश संजय करोल के ‘‘प्रभावशाली न्यायिक कार्य’’ की सराहना करते हुए कहा कि उनके फैसलों के माध्यम से दिया गया योगदान ‘‘व्यापक और महत्वपूर्ण’’ है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा न्यायमूर्ति करोल के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह में कहा कि न्यायमूर्ति करोल हमेशा उनके समक्ष आने वाले पक्षों को विवाद सुलझाने और आपसी सहमति के लिए साझा आधार तलाशने के लिए प्रोत्साहित करते थे। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अंत में, उनके (न्यायमूर्ति करोल के) प्रभावशाली न्यायिक कार्य के एक हिस्से का उल्लेख नहीं करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘वह हमेशा बार के युवा सदस्यों के विकास और उन्हें प्रोत्साहित करने के प्रति सजग रहे। उनसे बेहतर यह कौन जान सकता है, जिनमें से कई को उनकी अदालत में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) के रूप में काम करने का अवसर मिला।’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘बेंच के अपने सहयोगियों की ओर से मैं आपकी (न्यायमूर्ति करोल की) सुसंगत और संस्थागत प्रतिबद्धता के लिए और सबसे बढ़कर, हमें यह याद दिलाने के लिए कि न्याय करते समय दृढ़ता और दयालुता एक-दूसरे के विपरीत नहीं, बल्कि पूरक हैं, आपको धन्यवाद देता हूं।’’ न्यायमूर्ति करोल ने अपने संबोधन में न्यायाधीश के रूप में अपने करियर की शुरुआत से लेकर छह फरवरी 2023 को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किए जाने तक के अपने सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पिछले साढ़े तीन साल का कार्यकाल ‘‘गतिविधियों से भरपूर’’ और ‘‘चुनौतीपूर्ण’’ रहा है।

न्यायमूर्ति करोल ने कहा, ‘‘मैं बार से पुरजोर अनुरोध करुंगा कि हमारी (न्यायाधीशों की) ताकत बार से आती है... अगर न्याय प्रदान करने की व्यवस्था का कोई संरक्षक है, तो वह बार है। न्यायाधीश आते हैं और न्यायाधीश चले जाते हैं।’’ न्यायमूर्ति करोल ने कहा, ‘‘मैं यह भी कहना चाहूंगा कि बार जितना मजबूत होगा, बेंच भी उतनी ही मजबूत होगी।’’ तेईस अगस्त 1961 को जन्मे न्यायमूर्ति करोल ने शिमला में स्कूली शिक्षा प्राप्त की और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री हासिल की। उन्हें 1998 में हिमाचल प्रदेश का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया और उन्होंने 2003 तक इस पद पर सेवाएं दीं।

संजय करोल को 1999 में वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया और आठ मार्च 2007 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। न्यायमूर्ति करोल को नवंबर 2018 में त्रिपुरा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और बाद में नवंबर 2019 में उनका तबादला पटना उच्च न्यायालय कर दिया गया।

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