Prabhasakshi Exclusive: Justin Trudeau ने Khalistani Activities को बढ़ावा देकर Canada को बड़े खतरे में डाल दिया है

By नीरज कुमार दुबे | Jul 07, 2023

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में हमने इस सप्ताह ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि कनाडा और अमेरिका में जिस तरह खालिस्तानी गतिविधियां बढ़ रही हैं, खालिस्तान फ्रीडम और किल इंडिया रैली निकाली जा रही है। भारतीय दूतावासों, मिशनों को निशाना बनाया जा रहा है। उसे कैसे देखते हैं आप? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में जो लोग खालिस्तान समर्थकों को पाल पोस रहे हैं उन्हें समझना होगा कि यह लोग भारत का तो कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे अपितु ये लोग एक दिन उस देश को ही नुकसान पहुँचाने में जरूरत सफल हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि आज कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जिस पार्टी की बैसाखी के सहारे अपनी सत्ता चला रहे हैं और जिन वोटों के लालच में वह अपने देश में कट्टरपंथियों की ताकत को बढ़वा रहे हैं वह एक दिन उन्हें ही परेशान करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां किसी देश ने अतिवाद, आतंकवाद या कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया हो और उसे परिणाम ना भुगतना पड़ा हो।

इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi Exclusive: Xi Jinping ने Putin को Ukraine पर परमाणु हमला करने से क्यों रोक दिया?

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बागची ने बताया है कि ऐसे मुद्दों पर कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया से बात की गई है, कुछ जगहों से तत्काल कार्रवाई की सूचना मिली है और कुछ स्थानों को लेकर अपेक्षा है कि कार्रवाई की जायेगी। बागची ने कहा है कि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले की घटना को भी वहां के प्रशासन के समक्ष उठाया गया और वहां से उच्च स्तर पर प्रतिक्रिया आई है तथा ऐसे कृत्य को उन्होंने आपराधिक बताया है। कुछ दिन पहले ही भारत ने नयी दिल्ली में कनाडा के उच्चायुक्त को तलब किया था और कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की बढ़ती गतिविधियों पर एक ‘डिमार्शे’ (आपत्ति जताने वाला पत्र) जारी किया था। समझा जाता है कि भारत ने कनाडा के अधिकारियों से आठ जून को कनाडा में भारतीय मिशन के बाहर खालिस्तान समर्थक समूहों के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर उचित कदम उठाने को भी कहा है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि यह मुद्दा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं है बल्कि इनके नाम पर ही आतंकवादी तत्वों, अलगाववादी तत्वों को मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम जानना चाहते हैं कि देशों ने क्या कार्रवाई की या क्या कार्रवाई की जा रही है क्योंकि पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।’’ उन्होंने बताया कि बागची ने कहा है कि हम ऐसे हमलों या धमकियों को काफी गंभीरता से लेते हैं और जो भी कार्रवाई जरूरी है, हम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा दूतावास ऐसी घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के सम्पर्क में है। उन्होंने बताया कि प्रवक्ता ने कहा है कि मेजबान देश से वियना संधि के अनुरूप दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उम्मीद की जाती है। भारत ने सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर खालिस्तान समर्थकों के हमले का मामला भी अमेरिका के साथ उठाया है। यह कुछ महीनों के भीतर सैन फ्रांसिस्को में राजनयिक मिशन पर हमले की ऐसी दूसरी घटना है। खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने 19 मार्च को सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला कर तोड़फोड़ की थी। खालिस्तान समर्थकों ने दो जुलाई को एक वीडियो ट्विटर पर साझा किया, जिसमें सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में कुछ लोगों को आगजनी की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है। पिछले महीने, ब्रैम्पटन में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी एक झांकी निकाले जाने की घटना के दृश्य सोशल मीडिया पर आने के बाद भारत ने कनाडा को चेतावनी देते हुए कहा था कि द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह ठीक नहीं है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, ''स्पष्ट रूप से हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वोट बैंक की राजनीति के अलावा कोई ऐसा क्यों करेगा।’’ इसी सप्ताह सोमवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि ‘चरमपंथी, अतिवादी’ खालिस्तानी सोच भारत या अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के लिए ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि हालांकि एक बात अच्छी है कि ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की है कि लंदन में भारतीय उच्चायोग पर कोई भी प्रत्यक्ष हमला ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ है। सोशल मीडिया चैनलों पर खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारत विरोधी दुष्प्रचार के बीच ब्रिटिश सरकार का यह बयान सामने आया है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने ट्विटर पर घोषणा की कि देश में भारत के राजनयिक मिशन के कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भारतीय राजनयिक मिशन को निशाना बनाये जाने और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी और बर्मिंघम में भारत के महावाणिज्यदूत डॉ. शशांक विक्रम की तस्वीरों के साथ कुछ धमकी भरे पोस्टर ऑनलाइन सामने के बीच क्लेवरली ने कहा है कि लंदन में भारतीय उच्चायोग पर कोई भी प्रत्यक्ष हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि क्लेवरली ने कहा है कि हमने विक्रम दोरईस्वामी और भारत सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि उच्चायोग में कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा, कनाडा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे पोस्टरों में भारतीय अधिकारियों का नाम होने पर भारत को उसके राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया है और खालिस्तान की एक रैली से पहले प्रसारित हो रही ‘‘प्रचारात्मक सामग्री’’ को ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया है। उन्होंने कहा कि कनाडा की विदेश मंत्री मिलानी जॉली का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत ने कनाडा, ब्रिटेन तथा अमेरिका जैसे अपने साझेदार देशों को ‘‘चरमपंथी खालिस्तानी विचारधारा’’ को तवज्जो न देने के लिए कहा है क्योंकि यह उनके रिश्तों के लिए ‘‘सही नहीं’’ है। राजनयिकों की सुरक्षा के लिए कनाडा की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए जॉली ने वियना संधि के प्रति देश के अनुपालन का उल्लेख किया।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने भी ट्वीट किया, ‘‘अमेरिका शनिवार को सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में तोड़फोड़ और आगजनी के प्रयास की कड़ी निंदा करता है। अमेरिका में राजनयिक केंद्रों या विदेशी राजनयिकों के खिलाफ हिंसा एक अपराध है।’’

प्रमुख खबरें

Andhra Pradesh Panchayat Polls: नामांकन के दौरान 13 जिलों में 31 हिंसक घटनाएं, पुलिस पर पथराव

JLN Stadium में Diljit Dosanjh के शो का रास्ता साफ, सुरक्षा समीक्षा के बाद Delhi Police दी मंजूरी

SIR के विरोध में Delhi में Election Commission मुख्यालय की ओर मार्च, सुरक्षा कड़ी

Special Cell, Crime Branch और EOW में नए DCP तैनात, Delhi Police ने किए 25 तबादले