Jyoti Basu Birth Anniversary: बंगाल के लौह पुरुष कहे जाते थे ज्योति बसु, जानिए क्यों ठुकराया था PM पद

By अनन्या मिश्रा | Jul 08, 2025

भारत के वामपंथी सुपरस्टार ज्योति बसु का 08 जुलाई को जन्म हुआ था। हालांकि उनकी एकतरफा शैली के लिए हमेशा आलोचना की जाती थी। लेकिन ज्योति बसु की राजनीतिक सूझबूझ और निर्णय क्षमता को भी समान रूप से स्वीकार किया गया था। ज्योति बसु हमेशा हमेशा कलफ लगे सफेद कपड़े पहनना पसंद करते थे। बता दें कि वह 23 साल से भी ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल के सीएम रहे। वह किसी भी भारतीय राज्य के सबसे लंबे समय तक सीएम बने रहने वाले पहले व्यक्ति थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर ज्योति बसु के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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इस दौरान वह जवाहलाल नेहरू जैसे व्यक्तियों के लिए काम करने लगे। साल 1940 में भारत वापस लौटने के बाद बसु ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में बैरिस्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन करवाया। फिर साल 1944 में बंगाल असम रेलरोड वर्कर्स यूनियन का गठन हुआ, तो ज्योति बसु इसके पहले सचिव बने।

पश्चिम बंगाल के सीएम

देश को ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के साल 1952 में ज्योति बसु बारानगर से बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। 1950-60 के दशक में वह मूल रूप से प्रांतीय राजनीतिज्ञ बने रहे। अक्सर उनको गिरफ्तार किया जाता था और वह पुलिस को चकमा देने के लिए भूमिगत हो जाते थे। जब सीपीआई का विभाजन हुआ, तो ज्योति बसु सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो के सदस्य बन गए। साल 1977 में यानी की आपातकाल के बाद वाम मोर्चे ने पश्चिम बंगाल राज्य में अपनी सरकार बनाई और ज्योति बसु राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया।

पीएम पद का ऑफर

साल 1996 में ज्योति बसु भारत के पहले कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री बनने के काफी करीब पहुंच गए थे। ज्योति बसु को पीएम बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। यह भारतीय राजनीति के इतिहास में अहम घटना है, जिसको ज्योति बसु ने बाद में ऐतिहासिक भूल बताया था। ज्योति बसु का मानना था कि भारत में वामपंथी आंदोलन के लिए एक बड़ा मौका था, जिसको पार्टी ने गंवा दिया था।

मृत्यु

साल 2000 में ज्योति बसु ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था। वहीं 17 जनवरी 2010 को ज्योति बसु का निधन हो गया था। ज्योति बसु को बंगाल के लौह पुरुष के रूप में याद किया जाता है।

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